
रामेश्वर त्रिपाठी की पुस्तक अग्नि पक्षी : एक दंशगाथा का लोकार्पण
वाराणसी। रामेश्वर जी के लेखन में ,उनकी कविता में लोक एवं जिंदगी की लय एवं धड़कन विद्यमान है । आप निरंतर लेखन में सक्रिय रहें और हिंदी साहित्य को समृद्ध करते रहें। यह बात रविवार को शिवपुर स्थित अशोक मिशन एजुकेशन सोसाइटी ( शिवपुर) में रामेश्वर त्रिपाठी की पुस्तक अग्नि पक्षी :एक दंशगाथा के लोकार्पण के अवसर पर अध्यक्ष जितेंद्र नाथ मिश्र ने कही ।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर चौथी राम यादव ने कहां कि कवि होना बड़ा होना है लेकिन कवि का बड़ा मनुष्य होना उसके कवि होने की सार्थकता है। लोकधर्मी कवि ही बहादुर शाह जफर को गालिब से बड़ा कह सकता है । रामेश्वर जी लोकधर्मी जनकवि हैं और इन्होंने अपने को सच्चे अर्थों में जनकवि होना प्रमाणित किया है । रामेश्वर के भीतर व्यावहारिकता भी है और सैद्धांतिक दृढ़ता भी है ।
प्रो अवधेश प्रधान ने रामेश्वर जी के संघर्षों की चर्चा करते हुए कहां कि रामेश्वर जी का लेखन अपने समय एवं परिवेश का सच्चा दस्तावेज है । प्रोफेसर बलराज पांडे ने रामेश्वर जी के सहज -सरल व्यक्तित्व के विविध पहलुओं की चर्चा की । प्रो श्रद्धानंद ने कहा कि रामेश्वर जी को सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव एवं डॉ. विश्वनाथ प्रसाद जैसे लोगों ने प्रेरित किया तथा त्रिलोचन धूमिल जैसे लोगों की भाषा का प्रभाव उनके ऊपर पड़ा है ।डॉ.मुक्ता ने पुस्तक के संवेदनात्मक पहलुओं पर प्रकाश डाला। संचालन साहित्यकार डॉ रामसुधार सिंह, संयोजन अशोक आनंद ने किया। किया। डॉ. एमपी सिंह ,रामजी यादव केशव शरण, सुरेंद्र बाजपेई, अल कबीर आदि लोगों ने भी विचार व्यक्त किया ।स्वागत जगन्नाथ कुशवाहा तथा धन्यवाद प्रकाश डॉ प्रकाश उदय ने किया।
