वाराणसी।श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमन एक्सीलेंस, कलबुर्गी, कर्नाटक व अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘उच्च शिक्षा में मूल्यों का समावेश’ विषय पर छह दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का आयोजन श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमन एक्सीलेंस, कलबुर्गी, कर्नाटक में किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में मूल्य-आधारित शिक्षा के संस्थागत समावेशन को बढ़ावा देना था। शनिवार को संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) के छठे और अंतिम दिन शैक्षणिक संस्थानों के भीतर मूल्य-आधारित शिक्षा के व्यावहारिक कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया गया। जिसका मुख्य विषय था – “शैक्षणिक संस्थानों में मूल्य शिक्षा का व्यावहारिक क्रियान्वयन”। इस दिन के कार्यक्रमों में विशेष रूप से चिंतन सत्र, संवाद तथा समापन समारोह आयोजित किए गए।

प्रारंभिक सत्र का संचालन प्रो. मीनाक्षी बिस्वाल एवं उनकी टीम द्वारा किया गया, जिसमें गतिविधियों की पुनरावृत्ति एवं मूल्य आधारित शिक्षा के क्रियान्वयन पर गहन चर्चा हुई। जिन्होंने दिन 5 के मुख्य बिंदुओं पर फिर से विचार किया और समीक्षा की। रिपोर्ट में संस्थागत तंत्र के माध्यम से शैक्षणिक पाठ्यक्रम में मूल्य शिक्षा को एकीकृत करने के महत्व को पुष्ट करते हुए अंतर्दृष्टि, चर्चा और इंटरैक्टिव क्षणों को शामिल किया गया।

मूल्य-आधारित शिक्षा को शैक्षणिक संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू करने के उद्देश्य से आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP)का छठा और अंतिम दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, विद्वानों और प्रशासकों ने भाग लिया, जिससे शैक्षिक पाठ्यक्रम में नैतिकता और संस्थागत मूल्यों को समाहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संवाद हुआ।

समापन सत्र एफडीपी का गरिमापूर्ण समापन था। सत्र का संचालन डॉ. राजेश्वरी उल्लागड्डी ने किया।

सत्र की शुरुआत प्रोफेसर के. आनंदन के गर्मजोशी भरे स्वागत से हुई, जिन्होंने एफडीपी के दौरान सभी प्रतिभागियों, संसाधन व्यक्तियों और आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति उनकी समर्पित भागीदारी के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। अध्यक्षीय भाषण बिहार के जय प्रकाश विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर हरिकेश सिंह ने दिया। प्रो. सिंह, ने अध्यक्षीय संबोधन में मूल्यों के समावेशन को शिक्षा की आत्मा बताया। एसएसएसयूएचई, कलबुर्गी के माननीय कुलपति प्रो. श्रीकांत मूर्ति के., ने समापन भाषण में सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों को बधाई देते हुए इसे “शिक्षा के पुनर्रचना की दिशा में एक प्रेरक पहल” बताया।

फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) के संयोजक प्रो. अजय कुमार सिंह ने सम्पूर्ण कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की एवं सभी सहभागीगण, विशेषज्ञों, तकनीकी एवं प्रशासनिक टीम को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर यह स्पष्ट रूप से अनुभव किया गया कि मूल्य-आधारित शिक्षा केवल एक विषय नहीं, बल्कि समग्र शिक्षा प्रणाली की आत्मा है। प्रतिभागियों ने इसे एक “आध्यात्मिक, बौद्धिक एवं नैतिक उन्नयन” की दिशा में सार्थक यात्रा के रूप में अनुभव किया।

इस कार्यक्रम के सफल समापन के साथ, प्रतिभागियों ने मूल्य-आधारित शिक्षा को संस्थागत ढांचे में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नए दृष्टिकोण और व्यावहारिक रणनीतियों को आत्मसात किया। यह पहल सुनिश्चित करेगी कि शैक्षिक विकास में नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी जाए। इस कार्यक्रम में भारत भर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से 150 से अधिक शिक्षक भाग ले रहे हैं, जो भारत के सत्रह राज्यों और एक अंतरराष्ट्रीय देश, मिस्र, का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का संयोजन प्रो. मीनाक्षी बिश्वाल और प्रो. अजय कुमार सिंह द्वारा किया जा रहा है।

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