विजय शंकर ने किया प्रेमचंद की कहानी बाबा जी का भोग का पाठ

 

 

वाराणसी। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राम सुधार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी साहित्य के यथार्थवादी शिखर-पुरुष हैं।‌ जिन्होंने समाज की विडंबनाओं, विसंगतियों और अंतर्विरोधों को सजीव रूप में अपनी कहानियों में प्रस्तुत किया। बाबा जी का भोग उनकी ऐसी ही कहानी है जिसमें धर्म और भक्ति के नाम पर फैले अंधविश्वास, पाखंड और सामाजिक असमानता पर तीखा व्यंग्य किया गया है। डा.सिंह रविवार को प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र की ओर से प्रेमचंद स्मारक स्थल लमही में आयोजित सुनों मैं प्रेमचंद कहानी पाठ 1581 दिवस पूर्ण होने पर कहीं । प्रेमचंद की कहानी बाबा जी का भोग का पाठ साहित्यकार विजय शंकर पाण्डेय ने किया। सम्मान डा. राम सुधार सिंह व नरेन्द्र नाथ मिश्र, प्रो श्रद्धानंद ने किया। प्रो श्रद्धानंद ने कहा कि बाबा जी का भोग सिर्फ उस काल की कहानी नहीं है, बल्कि आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है।

सोच-विचार पत्रिका के संपादक नरेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि कहानी बाबा जी का भोग प्रेमचंद की उत्कृष्ट रचनाओं में से एक है। इस अवसर पर निदेशक राजीव गोंड, चंदन मौर्य, रोहित गुप्ता, यश वर्मा, राहुल यादव, राजेश श्रीवास्तव, देव बाबू, आयुषी दूबे, राजेश श्रीवास्तव थे। धन्यवाद ज्ञापन मनोज विश्वकर्मा ने किया।

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