गुजरात / वाराणसी। सोमवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, बीएचयू, वाराणसी और गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद, गुजरात के संयुक्त तत्वावधान में “कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा विशाल मुक्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम निर्माण (MOOC)” विषय पर छः व्यावसायिक विकास कार्यक्रम का शुभारम्भ व आयोजन गूजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद, गुजरात परिसर में हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ सामूहिक प्रार्थना, गूजरात विद्यापीठ एवं ज्ञानदीप प्रज्वलन पूर्वक किया गया। यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को मैसिव ओपन एंड ऑनलाइन कोर्सेस विकास में व्यावहारिक प्रशिक्षण और सैद्धांतिक आधार प्रदान करने, डिजिटल सामग्री निर्माण करने, ऑनलाइन शिक्षण के वातावरण निर्माण करने और डिजिटल सामग्री निर्माण के लिए प्रासंगिक उपकरणों और प्लेटफार्मों के साथ दक्षता प्रदान करने के लिए आयोजित किया जा रहा है।

प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में इस तथ्य को रेखांकित किया कि आज की दुनिया में प्रौद्योगिकी कोई विकल्प नहीं, अपितु एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है। इस संदर्भ में डॉ. अनीश चिनुभाई बेरौनेट ने 1997 के विश्व शतरंज प्रतियोगिता का उदाहरण देते हुए बताया कि जब एक कंप्यूटर ने विश्व चैंपियन को पराजित किया, तब से यह प्रमाणित हो गया कि प्रौद्योगिकी की शक्ति निर्विवाद है। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. नवीन शेठ, पूर्व कुलपति, गुजरात प्रौद्योगिकीय विश्वविद्यालय, ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 वर्तमान भारत का वह दस्तावेज है जो भारत को शैक्षिक हब के रूप में बदल देगा। यह भविष्य के भारत का दस्तावेज है, यह सुनिश्चित करता है कि भारत का विकास तो हो, लेकिन अपने जड़ों से अलग होकर नहीं अपितु अपने जड़ों से जुड़कर। यह कार्यक्रम इस प्रकार का प्रशिक्षण आधारित गुजरात का शायद प्रथम कार्यक्रम है। उद्घाटन वक्तव्य के क्रम में अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने कहा कि भारत प्राचीन काल में विश्व गुरु रहा है और इसके विश्व गुरु होने का प्रमुख कारण यहां की शिक्षा प्रणाली रही है भारत की शिक्षा प्राचीन काल से ही अनुभव आधारित रही है। आज का यह एक्सपीरियंशियल लर्निंग कोई नई बात नहीं है, अगर लर्निंग में एक्सपीरियंस आधारित नहीं है तो वह केवल सूचना मात्र है, लर्निंग नहीं है। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र भविष्य के भारत के अपेक्षाओं के अनुरूप शिक्षक निर्माण में निरंतर कार्य कर रहा है। हम जहां एक तरफ शिक्षकों को नवीन शिक्षण प्रौद्योगिकी में दक्ष बना रहे हैं वहीं भारतीय ज्ञान परंपरा के प्राचीन पद्धतियों को भी शिक्षण में एकीकृत करने के लिए शिक्षकों को तैयार कर रहे हैं।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ. हर्षद पटेल, कुलपति, गूजरात विद्यापीठ ने की। डॉ. पटेल ने कहा कि यह शुभ अवसर है की अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र एवं गुजरात विद्यापीठ एक साथ एक मंच पर शिक्षकों को सशक्त बनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। प्रौद्योगिकी में सम्पूर्ण विश्व को जोड़ने की अद्वितीय क्षमता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी शहरी और ग्रामीण समुदायों के बीच की दूरी को पाटने का कार्य कर रही है, जो कि अत्यंत सकारात्मक संकेत है। इसके पश्चात डॉ. अभिषेक कुमार, साइंटिस्ट ई, इन्फ्लिबनेट ने ई-लर्निंग पर एक व्यावहारिक सत्र संचालित किया, जिसमें ऑनलाइन शिक्षण हेतु विषय प्रस्तुति की विधियों को विस्तार से समझाया गया। तत्पश्चात प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत डिजिटल पहलों पर आधारित एक विचारोत्तेजक सत्र लिया। अतिथियों का स्वागत प्रो. दीपूबा देवड़ा (डीन, शिक्षा संकाय, गूजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद) ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. जिज्ञेश पटेल ने किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. राजा पाठक, डॉ. दीप्ति गुप्ता तथा प्रो. जिज्ञेश पटेल ने किया।

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