
वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), बी.एच.यू, वाराणसी द्वारा “एआई-समर्थित शोध : विचार से प्रकाशन तक” विषय पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का हुआ।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के नैतिक उपयोग और शोध लेखन की दक्षता को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रो० प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने अध्यक्षता की। अपने उद्बोधन में प्रो० सिंह ने उच्च शिक्षा एवं शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एआई उपकरण शोध की गुणवत्ता, गति और प्रभाव को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं तथा ये राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का प्रयोग सदैव मानवीय रचनात्मकता और चिंतन को सशक्त बनाने के लिए होना चाहिए, न कि उसका स्थान लेने के लिए।
इसके पश्चात दो और महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए जिनमें प्रथम सत्र में प्रो० आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई द्वारा “एनईपी 2020, उच्च शिक्षा में शोध और एआई की भूमिका” विषय पर व्याख्यान दिया गया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीती 2020 में प्रौद्योगिकी-समर्थित एवं नवाचार आधारित उच्च शिक्षा की दृष्टि को समझाते हुए बताया कि एआई उपकरण शोध की योजना, समीक्षा और विश्लेषण में अत्यंत उपयोगी हैं। प्रो० श्रीवास्तव ने शोध में प्रयुक्त होने वाले टूल्स को बताते हुए कहा कि ये उपकरण हमारे मौलिक चिंतन को सहायता करने के लिए हैं तथा एआई उपकरणों को प्रयोग करते हुए हमें यह ध्यान रखना होगा कि हमारी मौलिकता तथा रचनात्मकता बनी रहे। अगर हमने शोध कार्य में नैतिकता नहीं बरती तो इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। दुसरे सत्र में प्रो० गौरव सिंह, सीआईईटी, एनसीईआरटी, नई दिल्ली ने “शैक्षणिक लेखन और शोध शैलियाँ” विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने शोध लेखन की संरचना, विभिन्न शोध विधाओं की समझ और एआई उपकरणों के माध्यम से लेखन की स्पष्टता व प्रभावशीलता बढ़ाने पर चर्चा की।
यह कार्यशाला दिनांक 13 से 17 अक्टूबर 2025 तक ऑनलाइन आयोजित की जा रही है, जिसमें 19 राज्यों के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों से 127 शिक्षक एवं शोधार्थी भाग ले रहे हैं। यह सत्र शिक्षकों और शोधकर्ताओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग कर शोध की गुणवत्ता, दक्षता और वैश्विक पहुँच को सुदृढ़ करने के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का संयोजन डॉ० राजा पाठक और डॉ० दीप्ति गुप्ता द्वारा किया जा रहा है।
