वाराणसी। रामघाट स्थित सॉन्गवेद विद्यालय मे रविवार को पूर्वाह्न में शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के दंडक्रम (विकृति ) के पारायण का शुभारंभ हुआ। इसमें प्रारंभ में श्री गणेश पूजन, पुण्याह वाचन, नवग्रह पूजन तथा वेद पुस्तक पूजा एवं गुरु पूजा की गई।

इस कार्यक्रम में काशी के वैदिक विद्वान, पंडित लोग और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे ।भारतवर्ष के विभिन्न प्रांतो से विद्वान पधारे।

काशी के दक्षिणामूर्ति मठ के अधिपति पूज्यपाद 1008 पुण्यानंद गिरी महाराज जी के शिष्य स्वामी श्री 1008 स्वयंप्रकाश गिरी महाराज जी तथा श्री 108 महेश चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज आशीर्वाद देने पधारे थे। विद्यालय, गीर्वार्णवागवर्धिनी सभा एवं महाराष्ट्र के आहिल्यानगर के श्रुति स्मृति ज्ञान मंदिर वेद पाठशाला के द्वारा श्री स्वयंप्रकाश गिरी जी महाराज को अभिनंदन पत्र,माला महावस्त्र एवं श्रीफल अर्पित किए गए। श्रुति स्मृति ज्ञान मंदिर वेद पाठशाला के छात्र तथा श्री महेश चंद्रकांत रेखे जी के सुपुत्र चिरंजीव देवव्रत महेश रेखे महोदय ने दंडक्रम (विकृति) पारायण प्रारंभ कर सभी को चमत्कृत किया। पारायण का दृश्य अद्भुत रहा ।पारायण कंठस्थ हुआ। वेदमूर्ति श्री देवेंद्र रामचंद्र गढीकर महोदय ने मनोयोग से पारायण का श्रवण किया।

सान्गवेद विद्यालय के अध्यक्ष पं विश्वेश्वर शास्त्री द्रविड़ जी ने वेद की विकृतियों की रक्षा के लिए ऐसे पारायण की आवश्यकता बतलाई ।दक्षिणामूर्ति मठ से पधारे श्री 1008 स्वयंप्रकाश गिरी जी महाराज ने गीता शांकर भाष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्राह्मणत्व की रक्षा वेद रक्षा से होती है ।वेद जब सुरक्षित रहेगा तभी वैदिक धर्म सुरक्षित रहेगा ।अत: इस दंडक्रम पारायण से मैं अत्यंत प्रसन्न हूं।श्री 108 महेश चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि वेद विद्या और श्री विद्या इन दोनों के होने पर व्यक्ति का जीवन कृतार्थ हो जाता है ।मैं इस पारायण के लिए चिरंजीवी देवव्रत महेश रेखे को पूर्ण आशीर्वाद दे रहा हूं।इस अवसर पर सर्वश्री दिव्य चेतन ब्रह्मचारी जी, प्रोफेसर पतंजलि मिश्र, चंद्रशेखर घनपाठी,अशोक शास्त्री कुलकर्णी ,स्वानंद धाय गुढे ने दंड क्रम पारायण पर प्रसन्नता व्यक्त की और विश्वनाथ जी की कृपा से पारायण के निर्विघ्न पूर्ण होने की कामना की।वेद मूर्ति श्री महेश चंद्रकांत रेखे जी ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में चारों वेदों के मंत्र पाठ से आशीर्वाद वैदिको ने दिया। सभी वैदिकों का सत्कार किया गया ।यह पारायण 30 नवंबर 2025 तक प्रतिदिन पूर्वाह्न में 8बजे से 11:30 बजे तक सान्गवेद विद्यालय में चलता रहेगा।

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