वाराणसी। अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू, वाराणसी में 13 से 17 अक्टूबर 2025 तक पांच दिवसीय ‘एआई-समर्थित शोध : विचार से प्रकाशन तक’ कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत डा राजा राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी के ‘एआई समर्थित साहित्य सर्वेक्षण” विषय पर व्याख्यान से हुआ।

उन्होंने “एआई समर्थित साहित्य सर्वेक्षण’ विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण जैसे एलिसिट, रिसर्च रैबिट, कनेक्टेड पेपर्स एवं सिमांटिक स्कॉलर शोधार्थियों को प्रासंगिक और नवीनतम साहित्य की खोज में सहायता करते हैं। डॉ॰ पाठक ने कहा कि इन एआई टूल्स के माध्यम से शोधकर्ता न केवल गुणवत्तापूर्ण स्रोत चुन सकते हैं, अपितु शोध में विद्यमान गैप की पहचान कर अध्ययन की दिशा भी अधिक सटीक रूप से निर्धारित कर सकते हैं।

कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और शोधार्थियों को एआई तकनीक के प्रभावी प्रयोग से शोध कार्य की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित करना है।

दूसरे सत्र में डॉ॰ सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी ने ‘रेफरेंसिंग एंड बिबलियोग्राफी’ विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न संदर्भ शैलियों जैसे एपीए, एमएलए, शिकागो तथा हावर्ड का परिचय देते हुए बताया कि शोध लेखन में उचित संदर्भ व्यवस्था न केवल अकादमिक ईमानदारी का प्रतीक है, बल्कि यह शोध को प्रमाणिकता और विश्वसनीयता भी प्रदान करती है। उन्होंने एआई-आधारित जोटेरो, मेंडले और एंडनोट जैसे उपकरणों के माध्यम से संदर्भ प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर भी चर्चा की।

इस कार्यशाला में देश के 19 राज्यों के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों से 127 शिक्षक एवं शोधार्थी भाग ले रहे हैं।

यह सत्र शिक्षकों और शोधकर्ताओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग कर शोध की गुणवत्ता, दक्षता और वैश्विक पहुँच को सुदृढ़ करने के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का संयोजन डॉ० राजा पाठक और डॉ० दीप्ति गुप्ता द्वारा किया जा रहा है।

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