वाराणसी । बुधवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू, वाराणसी में चल रहे पांच दिवसीय ‘एआई- समर्थित शोध : विचार से प्रकाशन तक’ कार्यक्रम के तीसरे दिन की शुरुआत डॉ० राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी के व्याख्यान से हुई। उन्होंने ‘शोध में गैप की पहचान, शोध प्रश्न एवं शोध उद्देश्यों का निर्माण’ विषय पर विस्तृत रूप से चर्चा की। डॉ० पाठक ने बताया कि किसी भी शोध की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि शोधकर्ता विद्यमान साहित्य में मौजूद रिक्तियों (गैप्स) की पहचान कितनी सटीकता से करता है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों की सहायता से शोध में संभावित नई दिशाओं को चिन्हित करने, प्रासंगिक शोध प्रश्न तैयार करने तथा ठोस एवं मापनीय शोध उद्देश्यों के निर्माण की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।

दूसरे सत्र में डॉ० दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी ने ‘शोध प्राविधि एवं एआई-सहायता से टूल डिज़ाइन’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि शोध प्राविधि किसी भी अध्ययन की वैज्ञानिकता और विश्वसनीयता की आधारशिला होती है। डॉ० गुप्ता ने एआई-आधारित उपकरणों के माध्यम से शोध उपकरणों, जैसे प्रश्नावली, साक्षात्कार-सूची एवं सर्वे फॉर्म, के डिज़ाइन, वैधता एवं विश्वसनीयता जाँच की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने यह भी बताया कि एआई की सहायता से शोधकर्ता न केवल डेटा-संग्रह के उपकरणों को अधिक परिशुद्ध बना सकते हैं, बल्कि विश्लेषण की गुणवत्ता को भी उन्नत कर सकते हैं।

कार्यशाला में देश के 19 राज्यों से आए 127 शिक्षक एवं शोधार्थी सक्रिय रूप से सहभागिता कर रहे हैं। यह सत्र प्रतिभागियों को एआई उपकरणों का नैतिक और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग कर शोध की गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित कर रहा है। कार्यक्रम का संयोजन डॉ० राजा पाठक और डॉ० दीप्ति गुप्ता द्वारा किया जा रहा है।

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