
वाराणसी। गुरुवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू, वाराणसी में आयोजित पांच दिवसीय ‘एआई-समर्थित शोध : विचार से प्रकाशन तक’ कार्यक्रम के चौथे दिन की शुरुआत डा के थियागु सहाचार्य, केरला केंद्रीय विश्वविद्यालय, केरला के व्याख्यान से हुई। उन्होंने “एआई के माध्यम से डाटा विश्लेषण और दृश्यांकन” विषय पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। डॉ० थियागु ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकें शोध डेटा के विश्लेषण को न केवल तीव्र और सटीक बनाती हैं, अपितु डेटा के सार्थक प्रस्तुतीकरण के लिए भी नए दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। उन्होंने चैटजीपीटी, एसपीएसएस असिस्टेंट, ऑरेंज, टेबलो, और पॉवर बीआई जैसे एआई-सक्षम उपकरणों के प्रयोग से सांख्यिकीय विश्लेषण, पैटर्न पहचान, तथा परिणामों के प्रभावी दृश्यांकन की प्रक्रिया पर उदाहरण सहित चर्चा की। डॉ० थियागु ने इस बात पर बल दिया कि डेटा विश्लेषण में एआई का उपयोग शोधकर्ताओं को गहन अंतर्दृष्टि प्राप्त करने और जटिल निष्कर्षों को सरल व प्रभावी रूप में प्रस्तुत करने में सहायता करता है।
दूसरे सत्र में डॉ० मितेशकुमार पंड्या, डिप्युटी लाइब्रेरियन, एनएफएसयू, गांधीनगर ने “जर्नल चयन, सबमिशन एवं समीक्षकों की टिप्पणियों के प्रति प्रत्युत्तर में एआई की भूमिका” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि शोध प्रकाशन की प्रक्रिया में उचित जर्नल का चयन अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता है। डॉ० पंड्या ने एआई-समर्थित उपकरणों जैसे जर्नल फाइंडर, साइमैगो, और एआई-पावर्ड रिजेक्शन प्रेडिक्टर की सहायता से शोधार्थियों को उपयुक्त जर्नल चुनने की विधि समझाई। उन्होंने यह भी बताया कि सबमिशन के दौरान और समीक्षकों की टिप्पणियों के उत्तर देने में एआई कैसे शोधार्थियों को पेशेवर, तार्किक एवं विनम्र प्रतिक्रिया तैयार करने में मदद करता है।
कार्यशाला में देश के 19 राज्यों से आए 127 प्रतिभागी सक्रिय रूप से सहभागिता कर रहे हैं और एआई उपकरणों के प्रयोग से अपने शोध को अधिक सटीक, विश्वसनीय एवं प्रभावी बनाने की दिशा में प्रेरित हो रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ० राजा पाठक और डॉ० दीप्ति गुप्ता द्वारा किया जा रहा है।
