समृद्धि की कामना संग गूंजे शुभ मंत्र
रिपोर्ट वरिष्ठ संवाददाता, नज़र न्यूज नेटवर्क
वाराणसी। आस्था, श्रद्धा और समृद्धि का प्रतीक धनतेरस पर्व पर शनिवार को काशी ने फिर एक बार अपनी अद्भुत सांस्कृतिक छटा बिखेरी। सुबह से ही शहर के बाजारों में रौनक देखते ही बन रही थी। सर्राफा बाजार, चौक, अर्दली बाजार, भोजूबीर, मैदागिन, गोदौलिया, लहुराबीर, महमूरगंज और सिगरा जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। शुभ मुहूर्त में लोगों ने सोना, चांदी, बर्तन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और दीये-लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ खरीदीं। शहर के ज्वेलरी शो-रूम में ग्राहकों की लाइनें लगी रहीं। दुकानदारों ने बताया कि इस बार खरीदारी पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक रही। ग्राहकों के चेहरे पर जहां उत्साह था, वहीं व्यापारियों के चेहरे पर संतोष की मुस्कान झलक रही थी। आस्था और परंपरा का संगम धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा का विशेष महत्व होता है। शहर के मंदिरों, घरों और संस्थानों में श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर से घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। शाम ढलते ही काशी के घाटों, मंदिरों और गलियों में दीपों की जगमगाहट ने अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किया। गंगा तट पर दीपदान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। व्यापारियों में उत्साह, खरीदारी में जोश अर्दली बाजार के एक बर्तन व्यापारी ने बताया कि सुबह से ही ग्राहकों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। लोग चांदी के सिक्के, बर्तन और गृह उपयोगी वस्तुएँ बड़ी मात्रा में खरीद रहे हैं।
सर्राफा बाजार में सोना-चांदी की खरीदारी चरम पर रही। युवा वर्ग ने इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और टू-व्हीलर की ओर रुख किया, तो गृहिणियों ने घर की सजावट के लिए मिट्टी के दीए, कुमकुम थालियाँ और तोरण खरीदे। दीपों से जगमग हुई काशी
रात होते-होते पूरा शहर दीपों की रोशनी से नहा उठा। हर गली-मोहल्ले में दीये जलाए गए, बच्चे आतिशबाजी करते नज़र आए, और वातावरण शुभ लाभ के जयघोष से गूंज उठा।
वाराणसी के अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट और राजघाट पर दीपदान का आयोजन हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
स्वास्थ्य और समृद्धि का संदेश
धनतेरस को आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरि के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस अवसर पर कई आयुर्वेदिक संस्थानों और चिकित्सकों ने जनजागरूकता कार्यक्रम चलाकर स्वास्थ्य को धन से जोड़ने का संदेश दिया।
उत्सव में डूबी काशी
काशी की रंग-बिरंगी साज-सज्जा, दीपों की झिलमिलाहट, और श्रद्धा की भावना ने त्योहार को विशेष बना दिया। लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएँ दीं और सोशल मीडिया पर जय लक्ष्मी माता और शुभ धनतेरस के संदेशों की बाढ़ आ गई।
