रिपोर्ट वरिष्ठ संवाददाता, नज़र न्यूज नेटवर्क 

 

वाराणसी। दीपावली, प्रकाश और उत्साह का त्योहार, भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है जो अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। दीपावली का त्योहार पाँच दिनों तक चलने वाला पर्व है। धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज। इस पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है, जब लोग आरोग्य के देवता धन्वंतरि और धन की देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। दीपावली की रात्रि में माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के साथ घर-आँगन दीपों से सजाए जाते हैं। यह दृश्य भारतीय संस्कृति की सौंदर्यबोध और आध्यात्मिकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप प्रज्वलित किए। तब से यह परंपरा आज तक जीवंत है। जैन धर्म में यह दिन भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है, वहीं आर्य समाज इसे स्वामी दयानंद सरस्वती की पुण्यतिथि के रूप में स्मरण करता है। आज के परिप्रेक्ष्य में दीपावली केवल धार्मिक नहीं, बल्कि स्वच्छता, सौहार्द और पर्यावरण जागरूकता का भी पर्व बन चुकी है। प्रशासन और स्थानीय निकायों की ओर से स्वच्छता अभियान, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और अग्निशमन जैसी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाती हैं ताकि नागरिक सुरक्षित और उल्लासपूर्वक त्योहार मना सकें।

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