
आओ खुशियों के दीपक जलाऍं सभी।
गीत सौहार्द्र का मिल के गाऍं सभी।
ज्ञान की रौशनी दे उजाला भरे ।
नाम गुरुवर के दीपक जलाएं सभी।
ना ॲंधेरा धरा पर कहीं अब रहे।
पर्व दीपावली का मनाऍं सभी।
दीप खाली कभी तुम जलाना नहीं।
मन के भीतर की कमियाॅं जलाऍं सभी।
मन से मन का मिलन इस क़दर हो यहाॅं
तार हृदय के वीणा बजाऍं सभी।
वैर ना हो किसी से किसी का कभी।
ईर्ष्या द्वेष दिल का जलाऍं सभी।
जगमगाती दीवाली की बारात ले।
ज्ञान का मिल अलख हम जगाऍं सभी।
रोग का नाश हो सब निरोगी रहें।
इस दीवाली को ऐसे मनाऍं सभी।
ना अधूरा किसी का हो सपना यहाॅं।
फ़र्ज़ मानवता का निभाऍं सभी।
जान ले कर हथेली जो सरहद खड़े।
नाम उनके दिया एक जलाऍं सभी।

