
रिपोर्ट वरिष्ठ संवाददाता नज़र न्यूज नेटवर्क
वाराणसी। दीपावली के बाद श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया गया। सुबह से ही श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना में लीन रहे। जगह-जगह गोवर्धन पर्वत का प्रतीक रूप में गाय के गोबर से निर्माण कर सुंदर सजावट की गई, जिसे फूल-मालाओं और दीपों से सजाया गया। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता की पूजा कर सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना की। कई स्थानों पर भंडारा, कीर्तन और सामूहिक आरती का आयोजन किया गया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत गाते हुए पूजा में सम्मिलित हुईं।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को दूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था और ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इसलिए इस पर्व को ‘अन्नकूट उत्सव’ के रूप में भी मनाया जाता है।
मंदिरों में भगवान को 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित कर भोग लगाया गया। शहर के प्रमुख मंदिरों—दुर्गाकुंड, संकटमोचन, ललिता घाट स्थित राधाकृष्ण मंदिर और विभिन्न मठों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने श्रद्धापूर्वक कहा — “गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति, गौवंश और सामूहिक एकता के महत्व का संदेश देती है।”
