1 नवंबर 2025 को महापूर्णाहुति संग एक किलो सोना का नाग बाबा को अर्पित होगा

 

रिपोर्ट अनुपम भट्टाचार्य 

 

वाराणसी। आंध्र प्रदेश के तेलंगाना की सुप्रसिद्ध संस्था श्री पाराशर वैदिक आगम वेद शास्त्र परिषद के तत्वावधान में भारत राष्ट्र के सुख समृद्धि एवं विश्व कल्याण के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में 24 अक्टूबर 2025 से 1 नवंबर 2025 तक यज्ञों वै विष्णु: कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया है। जिसके अंतर्गत भगवान सूर्य को समर्पित आदित्य वैभव,प्राचीन ऋषियों को स्मरण करने हेतु भारतीय ऋषि वैभव एवं तेलुगु भाषा के साहित्य एवं कला पर विमर्श करने हेतु तेलुगु वैभव का आयोजन किया गया है ।

यह जानकारी श्री राम तारक आंध्रा आश्रम के सभागार में बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में सर्वश्री पंडित जगन्नाथ शास्त्री, वी वी सुंदर शास्त्री, चक्रवर्ती विजय नावड़ ने बताया।

कार्यक्रम के मुख्य संयोजक एवं आचार्य पंडित जगन्नाथ शास्त्री ने बताया 1 नवंबर 2025 सम्पन्न वैदिक अनुष्ठान की महापूर्णाहुति संग बाबा काशी विश्वनाथ जी को एक किलो सोना की नाग अर्पित किया जायेगा।

उन्होंने ने बताया कि वेद वृद्धि ,वेद रक्षा ,धर्म रक्षा एवं लोक कल्याण के संकल्प के साथ काशी में प्रथम बार भारत राष्ट्र को धन-धान्य से समृद्ध करने के लिए माता श्री लक्ष्मी जी के अनुग्रह से एक लाख बिल्व फल (मरेड के फलों सहित) से एक महान वैदिक यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है । जिसमें तिरुमला तिरुपति देवस्थानम से आए 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा प्रतिदिन 1लाख116 हवन किए जाएंगे। सभी प्रकार के यज्ञों का संचालन श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर के सामने होगा।

इस भव्य वैदिक अनुष्ठान का शुभारंभ दिनांक 24 अक्टूबर 2025 दिन शुक्रवार को प्रातः 8:00 बजे सभी भक्तों द्वारा सामूहिक गणपति पूजा, दीक्षा समारोह, कंकण पहनना और गणपति व्रत के साथ यज्ञ का प्रारंभ होगा। इस नौ दिवसीय अनुष्ठान के दौरान श्रीमद्भाग्वतगीता पाठ, श्रीमनरायणीयम पाठ ,संपूर्ण रामायण हरि कथागान, नीराजन मंत्र, श्री वेंकटेश्वर व्रतम, नवग्रह पूजा, विशेष शनैश्चरार्चन,श्री आदित्य व्रत, सामूहिक अर्ध्य प्रदान,श्री केदारेश्वर व्रत ,कर पार्थिव शिवलिंग की पूजा, हनुमद व्रतम, श्री महाविष्णु व्रत, तुलसी दलार्चन, शालिग्राम पूजा, श्री दत्तात्रेय व्रत गुरु पूजा, श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र का पाठ, श्री ललिता व्रत,श्री ललित सहस्त्रनाम कुमकुमार्चन, श्री महालक्ष्मी स्तोत्र ,सामूहिक श्री सत्यनारायण स्वामी व्रत ,श्री विष्णु सहस्त्रनाम पारायण का कार्यक्रम होगा ।

इसके अलावा मुख्य रूप से श्री तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के सौजन्य से काशी में पहली बार 30 अक्टूबर दिन गुरुवार को सायं 7:30 बजे से श्री वेंकटेश्वर स्वामी और श्री पद्मावती अलीमेलुमंगा का भव्य विवाह उत्सव आयोजित किया जा रहा है। जिसे दक्षिण भारत में श्रीनिवास कल्याण उत्सव भी कहा जाता है। प्रतिदिन के कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग दिन श्री सूर्यनारायण मूर्ति शांति कल्याणोत्सव, श्री शिव पार्वती कल्याणोत्सव, श्री सुब्रमण्यम शांति कल्याणोत्सव ,श्री रुक्मणि वेणुगोपाल स्वामी शांति कल्याणोत्सव, श्री सीता रामचंद्र शांति कल्याणोत्सव का आयोजन किया गया है।

1 नवंबर दिन शनिवार को संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान की महापूर्णाहुति दोपहर 12:00 बजे से होगी।

प्रतिदिन श्रीचक्र नवावरण अर्चना की जाएगी। इस अर्चना का संचालन श्री नोरी कल्याण सुंदर एवं ब्रह्मश्री नोरी सुब्रह्मण्य शास्त्री की देखरेख में किया जाएगा। इस नौ दिवसीय अनुष्ठान में विशेष रूप से आशीर्वाद देने के लिए पुष्पगिरी

पीठाधीधिपति जगतगुरु श्री श्री श्री अभिनवोद्दंड विद्या शंकर भारती स्वामी जी महाराज, श्री अमृतानंद सरस्वती स्वामी जी, ब्रह्मश्री डा सामवेद षणमुख शर्मा जी एवं श्री श्री राधा मनोहर दास (धर्म मार्ग प्रचारक) सहित देश भर के वैदिक विद्वान काशी पधार रहे हैं ।इस अवसर पर प्राचीन ऋषियों एवं वैदिक संस्कृति पर आधारित चित्र प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी । प्रतिदिन सायं दक्षिण भारत के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये जायेंगे।

पत्रकार वार्ता में कार्यक्रम संयोजक एवं मुख्य आचार्य पंडित जगन्नाथ शास्त्री, श्री राम तारक आंध्र आश्रम के ट्रस्टी वी वी सुंदर शास्त्री, कार्यक्रम के मीडिया संयोजक चक्रवर्ती विजय नावड उपस्थित थे।

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