
वाराणसी। कचहरी परिसर में बुधवार की शाम अधिवक्ताओं ने अमर शहीद अशफाकुल्लाह खां की 125वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई। कार्यक्रम का नेतृत्व बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री व समाजसेवी नित्यानंद राय ने किया। अधिवक्ताओं ने अशफाकुल्लाह खां के चित्र पर पुष्प अर्पित कर मोमबत्ती जलाते हुए अशफाक उल्ला खां अमर रहें और जब तक सूरज-चांद रहेगा, अशफाक उल्ला खां का नाम रहेगा” के गगनभेदी नारे लगाए। नित्यानंद राय ने कहा कि अशफाकुल्लाह खां शाहजहांपुर के निवासी थे और तैराकी, घुड़सवारी, क्रिकेट, हॉकी तथा बंदूक चलाने में निपुण थे। वे महान क्रांतिकारी पं. रामप्रसाद बिस्मिल के बालसखा और उत्कृष्ट कवि थे। फांसी से पूर्व उन्होंने कहा था, मेरे हाथ इंसानी खून से नहीं रंगे, खुदा के यहाँ मेरा इंसाफ होगा।
19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद जेल में फांसी के फंदे को चूमने से पहले उन्होंने लिखा कुछ आरज़ू नहीं, मगर आरज़ू तो ये है, लाकर ज़रा-सी रख दो खाक-ए-वतन कफ़न पे। कार्यक्रम में विनोद पांडेय भैयाजी, आशीष सिंह, ऋषिकांत सिंह, सर्वजीत सिंह, प्रवीण दीक्षित, अनुपम सिंह, रजत उपाध्याय, अभिषेक चौबे मोनू और मनोज कुमार वर्मा सहित अनेक अधिवक्ता थे।
