अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र में छः दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

 

वाराणसी। सोमवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू, वाराणसी में छः दिवसीय “सिक्स-डे पायलट ट्रेनिंग प्रोग्राम फॉर एजुकेटर्स टू बी एंगेज्ड ऐज़ रिसोर्स पर्सन इन एचईआईज़” विषयक प्रोग्राम का शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण से हुआ।

मुख्य अतिथि प्रो ए सी पाण्डेय, निदेशक, इंटर यूनिवर्सिटी एक्सेलेरेटर सेंटर, नई दिल्ली रहे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो० प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने की।

प्रो ए सी पाण्डेय, निदेशक, इंटर यूनिवर्सिटी एक्सेलेरेटर सेंटर, नई दिल्लीने अपने उद्बोधन में प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें शिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करना है, जो उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक अहम कदम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि एक सुव्यवस्थित प्रशिक्षण मॉड्यूल न केवल शिक्षकों की दक्षता बढ़ाता है, बल्कि छात्रों के कौशल विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रो प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने सभी प्रतिभागियों एवं मुख्य अतिथि का स्वागत किया।

उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारी भारतीय ज्ञान प्रणाली में शिक्षा के सभी पहलू समाहित हैं, जो प्रशिक्षण और कौशल आधारित रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों का प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए एक प्रभावी प्रशिक्षण मॉड्यूल का ढांचा तैयार करना जरूरी है, जिससे शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके और वे छात्रों के कौशल विकास में बेहतर योगदान दे सकें।

प्रो अशीष श्रीवास्तव,अधिष्ठाता (शिक्षण एवं अनुसंधान), आईयूसीटीई ने कार्यक्रम की बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें प्रशिक्षण मॉड्यूल के विकास की प्रक्रिया शामिल है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है।

पहले सत्र में प्रो ए सी पांडेय, निदेशक, इंटर यूनिवर्सिटी एक्सेलेरेटर सेंटर, नई दिल्ली ने “उच्च शिक्षा में नैतिकता और व्यावसायिकता” विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि एक शिक्षक की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि नैतिक मूल्यों और व्यावसायिक आचरण को भी समाहित करना आवश्यक है। सत्र के दौरान प्रो. पाण्डेय ने एक कार्यशाला का संचालनभी किया, जिसमें प्रतिभागियों ने मिलकर शिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु मॉड्यूल विकसित करने की प्रक्रियापर कार्य किया। उन्होंने मॉड्यूल निर्माण के विभिन्न चरणों, आवश्यकताओं और गुणवत्ता मानकों पर विस्तार से चर्चा की। दूसरे सत्र में प्रो प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, ने “भारतीय ज्ञान प्रणाली”विषय पर विस्तार से विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि भारत की पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में नैतिकता, कौशल, और जीवन मूल्यों का समावेश रहा है, जो आज की शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रेरणास्रोत है। साथ में, उन्होंने एक कार्यशाला का संचालनभी किया, जिसमें प्रतिभागियों ने मिलकरशिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु मॉड्यूल विकसित करने की प्रक्रियापर कार्य किया। द्वितीय सत्र के दूसरे वक्ता के रूप में डॉ. शिव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, विज्ञान भारती ने “भारतीय ज्ञान प्रणाली” विषय पर विचार साझा किए। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय शिक्षा की परंपराओं, मूल्यों और व्यावहारिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली न केवल ज्ञान आधारित रही है, बल्कि यह कौशल और नैतिकता पर भी केंद्रित रही है। उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों को प्रेरित किया कि वे इस समृद्ध विरासत को समझें और इसे आधुनिक संदर्भ में प्रशिक्षण मॉड्यूल के निर्माण से जोड़ें।

कार्यक्रम में देश के 9 से अधिक राज्यों यथा- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात, तेलंगाना, और ओडिशा से 28 से अधिक प्रतिभागीभाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला के संयोजक प्रो अजय कुमार सिंह, आईयूसीटीई, और सह-संयोजक डा राज सिंह, आईयूसीटीई और ज्ञानेंद्र सिंह, आईयूसीटीई हैं।

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