श्रीविद्यामठ में आयोजित हुआ 2500वां आराधना महोत्सव

 

वाराणसी। बुधवार को कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर जब पूरा देश देव दीपावली का उत्सव आयोजित कर रहा है ऐसे समय में हम आद्य शङ्कराचार्य जी के अनुयायियों के लिए एक विशेष अवसर उपस्थित हुआ है।

आज से 2500 वर्ष पूर्व कार्तिक पूर्णिमा के ही दिन भगवत्पाद आदि शङ्कराचार्य जी ने अपने पाञ्चभौतिक शरीर को त्यागकर केदारनाथ में समाधि ली थी। संन्यासियों की परम्परा में इस दिन को आराधना महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

काशी के श्रीविद्यामठ में ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय के जगद्‌गुरु शङ्कराचार्य जी महाराज के दिव्य सान्निध्य में भगवत्पाद आद्य शङ्कराचार्य का 2500वाॅ आराधना महोत्सव आयोजित हुआ।

परमाराध्य शङ्कराचार्य जी ने इस अवसर पर शंकराचार्य घाट का प्रतीकात्मक उद्घाटन करते हुये इस घाट पर नित्योत्सवपूर्वक श्रीशङ्कराचार्य सम्मान किये जाने की घोषणा की ।

इस अवसर पर शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी ने कहा कि आज आद्य शङ्कराचार्य को इस धराधाम से गमन किए हुए 9 लाख 12 हजार 500 दिन पूरे हुए हैं। इसीलिए आज के दिन ज्योतिष्पीठ के यति सेवालय की ओर से आद्य शङ्कराचार्य की परम्परा में दीक्षित होकर दण्ड संन्यास धारण कर संन्यास को जीने वाले दण्डी संन्यासियों को एवं आद्य शङ्कराचार्य पर विशेष कार्य करने वाले विद्वानों भक्तों को यह सम्मान दिया जाएगा। नित्योत्सव के आयोजन की प्रथम कडी में यह सम्मान सर्वप्रथम पूरे देश के दण्डी संन्यासियों को दिया जाएगा। प्रतिदिन एक दण्डी संन्यासी का आह्वान करके उनको सम्मानित किया जाएगा।

सम्मान की इस कडी आज सर्वप्रथम कोलकाता शङ्कर मठ के कार्यकारी अध्यक्ष वेदान्त के विद्वान् दण्डी संन्यासी डाक्टर स्वामी प्रज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर परमधर्माधिश शंकराचार्य जी महाराज ने ज्योर्तिमठ प्रकाशन सेवालय द्वारा प्रकाशित सुंदरकांड का विमोचन किया।जिसके अंतर शंकराचार्य जी महाराज ने हर्षपूर्वक देवदीपावली के पावन अवसर पर दीपदान किया।

परमाराध्य ने शङ्कराचार्य घाट का प्रतीकात्मक शुभारम्भ किया और पूर्णिमा महोत्सव के संयोजक हजारी कीर्ति नारायण शुक्ल जी के संयोजकत्व में प्रख्यात कलाकारों ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति की।कलाकारों का नाम विवरण निम्न है गायन~सायन मुखर्जी, सवार्णी धारा,तनुश्री दत्ता,शेफाली मुखर्जी।तबला~ज्ञानस्वरूप मुखर्जी,नितेश कुमार।

बांसुरी~हिमांशु कुमार।

हारमोनियम~कृष्ण कुमार।

सितार~यश सोनकर,सुहासिनी कुमारी।नृत्य~प्रियंका धारा, कृशिव धारा।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से सर्वश्री~साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रम्हचारी परमात्मानंद,स्वामी निधिरव्यानंद,हजारी कीर्ति शुक्ला सहित भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित उपस्थित रहे।

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