
वाराणसी। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘खुदाई फौजदार’ प्रेमचंद की सामाजिक यथार्थवादी दृष्टि का सशक्त उदाहरण है, जिसमें व्यवस्था में दबे-कुचले और शोषित वर्ग के संघर्ष को रेखांकित किया गया है। यह विचार प्रो श्रद्धानंद ने प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही में आयोजित सुनो मैं प्रेमचंद कार्यक्रम के 1728वें दिवस पर व्यक्त किए। इस अवसर पर कवि डॉ. शरद श्रीवास्तव ने कहानी का पाठ किया। जिनका सम्मान प्रो. श्रद्धानंद, प्रकाश कुमार श्रीवास्तव एवं निदेशक राजीव गोंड ने किया।
कवि प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा कि कहानी अमीर-गरीब के बीच की खाई और सत्ता के दुरुपयोग को उजागर करती है, वहीं अशोक पांडेय ने बताया कि प्रेमचंद ने समाज की असमान संरचनाओं को स्त्रियों के दुःख से जोड़ा है। कार्यक्रम में सुरेश चंद्र दूबे, कंचन वदन चतुर्वेदी, प्रांजल श्रीवास्तव, राहुल यादव, रोहित गुप्ता, विपनेश सिंह, ऋषभ आदि थे। संचालन आयुषी दूबे, स्वागत मनोज विश्वकर्मा ने किया।
