महर्षि दयानन्द के विचारों से गूंजा आनन्द बाग

 

वाराणसी। महर्षि दयानन्द काशी शास्त्रार्थ के 156वें स्मृति वर्ष पर आयोजित दो दिवसीय वैदिक धर्म महोत्सव का द्वितीय दिवस आनन्द बाग, दुर्गाकुण्ड स्थित शास्त्रार्थ स्थली पर वैदिक यज्ञ के साथ आरम्भ हुआ। यज्ञ की ब्रह्मा पाणिनि कन्या महाविद्यालय की ब्रह्मचारिणियाँ रहीं, जबकि आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक के आचार्यत्व में यजमान के रूप में महाराष्ट्र के आर्य समाज नांदेड़ से शंकर महाजन सपत्नीक उपस्थित रहे। सुल्तानपुर से आए युवा भजनोपदेशक राममिलन आर्य ने सुमधुर भजन प्रस्तुत किए। विधायक डा.नीलकंठ तिवारी और हिन्दू युवा वाहिनी के मंडल प्रभारी अम्बरीश सिंह भोला ने आर्य समाज के कार्यों की सराहना करते हुए समाजसेवियों व दानदाताओं को सम्मानित किया। भाजपा युवा नेता सुजीत मौर्य ने कहा कि महर्षि दयानन्द द्वारा प्रज्वलित वैदिक ज्ञान की ज्योति को आगे बढ़ाया जाएगा। हरिद्वार से पधारे स्वामी वेदामृतानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि परमात्मा हर कर्म को देखता-सुनता है और मनुष्य को सद्कर्म की प्रेरणा देता है। हरियाणा के डॉ. सुश्रुत सामश्रमी ने गायत्री मंत्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बुद्धि का सदुपयोग ही मानवता का आधार है। अमेठी के डॉ. ज्वलन्त कुमार शास्त्री ने काशी शास्त्रार्थ की ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया, वहीं डॉ. प्रियंवदा ने महर्षि के नारी सम्मान से जुड़े कार्यों को रेखांकित किया। संचालन जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान प्रमोद आर्य ‘आर्षेय’ ने किया। आभार प्रदर्शन राजकुमार आर्य ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष प्रदीप आर्य ने किया।

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