यूपी कालेज में अमरकांत की जन्मशती पर संगोष्ठी 

 

वाराणसी। उदय प्रताप कालेज में प्रसिद्ध कथाकार अमरकांत की जन्मशती पर हिन्दी विभाग की ओर से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र का विषय भारतीय समाज और अमरकांत रहा। जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध कथाकार रणेन्द्र ने की। उन्होंने कहा कि अमरकांत भारतीय मध्यवर्ग के अंतर्विरोधों को यथार्थ रूप में चित्रित करते हैं। प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि उनके कथा-साहित्य का स्वर मूलतः पुरबिया है जिसमें भूख, असमानता और बदलते समाज की झलक मिलती है। प्रो. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि उनकी कहानियों में सौंदर्य का यथार्थ धीरे-धीरे उभरता है। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने अमरकांत को प्रेमचंद की परंपरा का जिज्ञासु यथार्थवादी लेखक बताया। द्वितीय सत्र का विषय प्रगतिशील आंदोलन और अमरकांत का कथालेखन रहा। जिसकी अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक वीरेन्द्र यादव ने कहा कि अमरकांत की रचनाएँ समाजवादी मूल्यों और स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से जुड़ी हैं। जनकवि शिवकुमार पराग ने कहा कि अमरकांत की कहानियाँ जनचेतना जगाने वाली हैं। प्रो. आशीष त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने प्रगतिशील कथा-परंपरा को नई दृष्टि दी। प्रो. नीरज खरे ने कहा कि उनकी प्रगतिशील दृष्टि फ़ार्मूलाबद्ध नहीं, बल्कि सादगी और व्यंग्य की गहराई से जीवन को देखती है। संचालन संजोजक प्रो. गोरखनाथ, प्रो. अनिता सिंह व डॉ. वंदना चौबे, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मधु सिंह और प्रो. गोरखनाथ ने दिया। इस अवसर पर डॉ. सदानंद सिंह, डॉ. एमपी. सिंह, प्रो. रमेशधर द्विवेदी, प्रो. प्रज्ञा पारमिता, प्रो. अंजू सिंह, डॉ. मीरा सिंह, डॉ. संजय श्रीवास्तव, प्रो. सुधीर कुमार शाही, प्रो. अलका रानी गुप्ता, प्रो. पंकज कुमार सिंह,डा.डीडी सिंह आदि थे।

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