खबर प्रसारित करने से पहले सत्यता को जाने

 

रिपोर्ट :- सन्तोष कुमार चतुर्वेदी 

 

कैमूर। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, कैमूर के समाहरणालय स्थित मुंडेश्वरी सभागार में रविवार को प्रेस दिवस पर “बढ़ती गलत सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता की रक्षा” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन जिला एडीएम एवं जिला सूचना जनसंपर्क पदाधिकारी एवं पत्रकार बंधुओं ने संयुक्त रूप दीप प्रज्वलित करके किया।

इसके बाद डीपीआरओ ने आगत पत्रकार बंधुओं का स्वागत करते हुए प्रेस दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो समाज को जागरूक करने, जनहित के मुद्दों को सामने लाने और शासन-प्रशासन एवं जनता के बीच मजबूत संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल युग के आगमन ने प्रेस की कार्यशैली और स्वरूप में व्यापक परिवर्तन किए हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन के व्यापक उपयोग ने समाचारों के प्रसार की गति को अत्यधिक तेज बना दिया है, जिससे सूचना कुछ ही क्षणों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन पोर्टल और सोशल मीडिया ने पत्रकारिता के दायरे और प्रभाव को कई गुणा बढ़ाया है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस तेजी के साथ मीडिया जगत के सामने कई चुनौतियां भी आई हैं। बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कई बार निष्पक्षता, संतुलन और तथ्यपरकता पर दबाव बनाया है। आज फेंक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार का खतरा बढ़ा है, ऐसे में पत्रकारों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि वे तथ्यों की जांच-पड़ताल कर सत्य समाचार जनता तक पहुंचाएं, ताकि प्रेस की विश्वसनीयता बनी रहे।

उन्होंने कहा कि मीडिया की आत्म-अनुशासन व्यवस्था ही इस स्थिति का सबसे प्रभावी समाधान है। समाचारों के प्रकाशन में सतर्कता, सत्यापन और तथ्य आधारित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सूचना विस्फोट के दौर में तेजी से आगे बढ़ने की होड़ में तथ्यात्मक त्रुटियों से बचना अत्यंत जरूरी है।

डीपीआरओ ने कहा कि समय के साथ माध्यम भले बदल जाएं, पर पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनहित, सत्य का प्रसार और लोकतंत्र को मजबूत करना ही रहेगा।

उन्होंने कहा कि मीडिया ने राष्ट्र और समाज की आवाज को सशक्त बनाया है और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न पत्रकारों ने भी अपनी महत्वपूर्ण राय, अनुभव और सुझाव साझा किए। परिचर्चा में मीडिया की वर्तमान स्थिति, उसके सामने चुनौतियां और भविष्य की दिशा पर विस्तृत चर्चा हुई।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर मनीष पांडेय, संतोष कुमार चतुर्वेदी, शंभू नाथ यादव, सत्यम कुमार उपाध्याय, सर्वेंदु दुबे, गोल्डन पांडेय, बागेश्वरी द्विवेदी, ब्रजेश दुबे, रवि जडेजा, सुनील पांडेय, ओम प्रकाश तिवारी, राशिद रौशन, सतेंद्र शर्मा आदि कई अन्य लोग उपस्थित रहे।

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