अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र में अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला का दूसरा दिन 

 

वाराणसी । मंगलवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में *“द डिजिटल पेडागॉजी: एजुकेटर्स फॉर टुमॉरो विषय पर सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने “द लिविंग माइंड: इमोशंस, ग्रोथ, एंड द साइंस ऑफ लर्निंग” विषय पर एक सत्र से किया। उन्होंने सीखने की प्रक्रिया में भावनाओं और न्यूरोप्लास्टिसिटी की भूमिका तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास पर उसके प्रभाव को रेखांकित किया तथा भावनात्मक रूप से संवेदनशील और प्रभावी शिक्षण परिवेश के निर्माण हेतु वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर विशेष बल दिया।

दूसरे सत्र में डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने “वायर्ड फॉर वंडर: न्यूरोप्लास्टिसिटी, इमोशन, एंड द हार्ट ऑफ लर्निंग” विषय पर प्रेज़ेंटेशन के साथ व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने मस्तिष्क की न्यूरोप्लास्टिसिटी और भावनाओं के बीच सीखने की प्रक्रिया से जुड़े गहरे संबंधों को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि जिज्ञासा और भावनात्मक जुड़ाव प्रभावी अधिगम के महत्वपूर्ण घटक हैं। साथ ही, उन्होंने शिक्षकों से सीखने को अधिक अर्थपूर्ण और मानव-केंद्रित बनाने के लिए इन पहलुओं को शिक्षण प्रक्रिया में सम्मिलित करने का आह्वान किया। तीसरे सत्र में प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई ने “डिज़ाइनिंग फॉर एवरी माइंड: द आर्ट ऑफ इन्क्लूसिव डिजिटल लर्निंग” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने समावेशी डिजिटल शिक्षण की अवधारणा और विविध पृष्ठभूमि के शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं पर चर्चा की। इस सत्र में सभी शिक्षार्थियों के लिए सुलभ, लचीले और समान अवसर प्रदान करने वाले शिक्षण डिज़ाइन पर बल दिया गया। उन्होंने तकनीक के माध्यम से सीखने को अधिक सहभागी, संवेदनशील और प्रभावी बनाने के उपाय भी साझा किए। अंतिम सत्र में डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने “हार्ट्स इन हार्मनी: वीविंग एसईएल इंटू द डिजिटल स्टोरी” विषय पर रोचक व्याख्यान दिया। उन्होंने डिजिटल शिक्षण में सामाजिक- भावनात्मक अधिगम (एसईएल) की भूमिका और उसके शैक्षिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सहानुभूति, भावनात्मक संतुलन और मानवीय संवेदनाओं को डिजिटल कहानी-वाचन से जोड़ने पर विशेष बल दिया। साथ ही, उन्होंने बताया कि एसईएल आधारित दृष्टिकोण डिजिटल शिक्षा को अधिक मानवीय, प्रभावी और समग्र बना सकता है।

इस कार्यक्रम में श्रीलंका, बेलारूस, कम्बोडिया, इक्वाडोर, घाना, कजाकिस्तान, केन्या, मोरक्को, मोज़ाम्बिक, म्यांमार, नामीबिया, नेपाल, रूस, रवांडा, तंजानिया, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, इथियोपिया, ताजिकिस्तान, ज़ाम्बिया, ज़िम्बाब्वे, कोट द’ईवोआर, और ट्रिनिडाड और टोबैगो 24 देशों के 40 शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम के निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई हैं, जबकि इसका समन्वयन डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है। सह-समन्वयक के रूप में डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई और डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। केंद्र के अन्य समस्त संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों ने भी इस अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफल आयोजन प्रक्रिया में सक्रिय योगदान कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *