
वाराणसी 1 जनवरी 2026, को डॉ. संपूर्णानंद की 136वीं जयंती है, जो उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के संस्थापक थे। उनका जन्म 1 जनवरी 1890 को वाराणसी में हुआ था और उन्होंने अपनी शिक्षा क्वींस कॉलेज, वाराणसी और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की।
उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के प्रभारी कुलपति प्रो रामपूजन पाण्डेय ने गुरुवार को संस्था के संस्थापक, स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद्, पत्रकार एवं पूर्व मुख्यमंत्री के जन्म जयंती महोत्सव पर बतौर अध्यक्षीय उद्बोधन व्यक्त किया।
जयंतियों के माध्यम से हमारी युवा पीढ़ी उनके व्यक्तित्व कृतित्व को जान समझकर प्रेरित होती है।उनके अमर होने की दिशा को बताती है।
छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष एवं सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो शैलेश कुमार मिश्र ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि डॉ. संपूर्णानंद एक कुशल और निर्भीक राजनेता थे, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी भी थे और उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए कई आंदोलनों में भाग लिया।
प्रो शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि
डॉ. संपूर्णानंद ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी की स्थापना 1958 में की, जो संस्कृत भाषा और संस्कृति के अध्ययन के लिए एक प्रमुख संस्थान है। इस विश्वविद्यालय में म्यूजियम, वेधशाला और अन्य सुविधाएं हैं, जो संस्कृत के अध्ययन को बढ़ावा देती हैं।यह भाव उनके संस्कृत, संस्कृति एवं भारतीयता की तरफ प्रेरित करती है।
चीफ प्रॉक्टर प्रो जितेन्द्र कुमार ने बतौर विशिष्ट वक्ता कहा कि डॉ. संपूर्णानंद को उनकी उपलब्धियों के लिए कई सम्मान मिले, जिनमें मंगलाप्रसाद पुरस्कार, साहित्य वाचस्पति उपाधि और डॉक्टरेट की उपाधि शामिल हैं।डॉ. संपूर्णानंद एक महान व्यक्ति थे, जिन्होंने अपने जीवन को देश की सेवा में समर्पित किया। उनकी जयंती पर, हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके आदर्शों को याद करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन बतौर संयोजक संस्कृत विद्या विभाग के डॉ रविशंकर पांडेय ने किया।
डॉ रविशंकर पांडेय स्वागत भाषण किया।डॉ विजेन्द्र आर्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में दीप प्रज्वलन करने के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ परिसर में स्थापित डॉ संपूर्णानंद जी की प्रतिमा एवं मां सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
मंचस्थ अतिथियों के द्वारा वैदिक, पौराणिक मंगलाचरण किया गया।
उपस्थित जन प्रो जितेन्द्र कुमार, प्रो शैलेश कुमार मिश्र,डॉ रवि शंकर पांडेय,डॉ विजेन्द्र कुमार आर्य,डॉ सत्येन्द्र कुमार यादव, प्रभु नाथ यादव, गिरीश कुमार श्रीवास्तव, काशीनाथ पटेल आदि उपस्थित थे।
