वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में आयोजित वार्षिक अन्तर्संकाय खेलकूद युवा महोत्सव प्रतियोगिता का भव्य एवं गरिमामय समापन हुआ। दिनांक 11 फरवरी से प्रारम्भ चार दिवसीय इस आयोजन के अन्तर्गत पारम्परिक पीले धौतवस्त्र एवं पारम्परिक वेशभूषा में आयोजित बैडमिंटन प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। प्रतियोगिता की विशेषता यह रही कि समस्त गतिविधियों की उद्घोषणा संस्कृत भाषा में की गई, जिससे वातावरण बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक गरिमा से परिपूर्ण हो गया।

समस्त प्रतियोगिता का सफल आयोजन शारीरिक शिक्षा एवं क्रीड़ा विभाग के सचिव एवं प्रभारी वैदिक विद्वान डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव के संयोजकत्व में सम्पन्न हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से बैडमिंटन से शरीर सुदृढ़ होता है, सहनशक्ति बढ़ती है, एकाग्रता एवं निर्णय क्षमता विकसित होती है तथा आत्मविश्वास और धैर्य का निर्माण होता है। साथ ही, यह खेल तनाव कम करने एवं अनुशासन, टीम भावना व सहयोग जैसे सामाजिक गुणों के विकास में सहायक है।

इस अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि खेल भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। संस्कृत माध्यम से खेलों का संचालन एवं उद्घोषणा करना देववाणी को जनभाषा से जोड़ने का अभिनव प्रयास है। इससे विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण, सहकार्य एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना का विकास होता है, जो उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध होता है।

*प्रतियोगिता परिणाम*

*महिला बैडमिंटन*

प्रथम — किरन यादव

द्वितीय — अर्चना मौर्या

तृतीय — निधि गुप्ता

*पुरुष बैडमिंटन*

प्रथम — रोहित मिश्रा

द्वितीय — शिवेन्द्रधर द्विवेदी

तृतीय — अंश तिवारी

डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव ने बताया कि प्रतियोगिता में संस्कृत उद्घोषक वेद विभाग के शोध छात्र यज्ञ नारायण रहे। साथ ही खेल प्रशिक्षक आदित्य कुमार एवं सोमनाथ पाण्डेय के सहयोग से आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

समापन अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों एवं सहयोगी कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत भाषा एवं खेल संस्कृति से युक्त ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करने का संकल्प व्यक्त किया। यह आयोजन विश्वविद्यालय में शिक्षा, संस्कृति और खेल के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा।

खेल प्रशिक्षक आदित्य कुमार ने खेल प्रतियोगिता का प्रबंधन किया।

कार्यक्रम के दौरान आचार्यगण, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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