वाराणसी। शुक्रवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में “ट्रांसफॉर्मिंग पेडागॉजी इन हायर एजुकेशन: साइंसेज़, मैथमेटिक्स, सोशल साइंसेज़, ह्यूमैनिटीज़ एंड मैनेजमेंट” विषय पर पाँच दिवसीय कार्यशाला के पांचवें दिन समापन सत्र आयोजित हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. राजा पाठक द्वारा मंगलाचरण से हुई। इसके उपरांत दीप प्रज्वलन, एवं माँ सरस्वती, व महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. अनु सिंह लाथर, कुलपति, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली रहीं तथा अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने की। प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान) आईयूसीटीई, वाराणसी ने स्वागत एवं संचालन डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने किया।

मुख्य अतिथि प्रो. अनु सिंह लाथर, कुलपति, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली ने कहा कि शिक्षण पद्धतियाँ केवल कक्षा के भीतर ही नहीं, बल्कि कक्षा के बाहर भी अत्यंत महत्वपूर्ण और उपयोगी होती हैं। उन्होंने समावेशिता, नैतिक मूल्यों और बालिका शिक्षा के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए इन मूल्यों को शिक्षा प्रणाली का अभिन्न अंग बनाना आवश्यक है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों को कार्यक्रम के सफल समापन पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम उच्च शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक पहल हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ऐसे प्रयास शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सशक्त बनाते हुए उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होंगे।

प्रथम सत्र में प्रो. कार्तिक दवे, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली ने “पेडागॉजिकल इनोवेशन इन मैनेजमेंट: क्रिटिकल थिंकिंग एंड रियल-वर्ल्ड इन्क्वायरी” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रबंधन शिक्षा में नवाचार, आलोचनात्मक चिंतन और वास्तविक समस्याओं पर आधारित अध्ययन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। द्वितीय सत्र की वक्ता प्रो. अनु सिंह लाथर, कुलपति, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली ने “इनोवेशन इन इंटरडिसिप्लिनरी पेडागॉजी: ब्रिजिंग साइंसेज़, सोशल साइंसेज़, ह्यूमैनिटीज़, एंड मैनेजमेंट” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि शिक्षा जगत में इंटरडिसिप्लिनरी पेडागॉजी को लेकर नवाचार की नई लहर देखी जा रही है। विश्वविद्यालय अब विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, मानविकी और प्रबंधन को एक साथ जोड़कर छात्रों को बहुआयामी दृष्टिकोण प्रदान कर रहे हैं। साथ ही सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने मॉड्यूल्स पर चर्चा कर उन्हें पूर्ण स्वरूप प्रदान किया।

इस अवसर पर ‘लाइफ साइंसेज़ पेडागॉजी’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया, जिसका संपादन डॉ. कुशाग्री सिंह, आईयूसीटीई, वाराणसी ने किया है। इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित 10 राज्यों के 40 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संयोजन आईयूसीटीई के सभी संकाय सदस्यों द्वारा किया गया।

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