“बुराई का रंग फीका हो, गुझिया की मिठास और प्रेम का गुलाल गहरा हो: यही होली का मुख्य सन्देश

आप सभी क्षेत्रवासियों, समस्त शिक्षक साथियों और मेरे प्रिय स्कूली बच्चों को रंगों के महापर्व ‘होली’ की अनंत बधाई!

 

​आज के समय में जब लोग अक्सर दूसरों की बुराइयों और कमियों को ढूंढने में ऊर्जा व्यर्थ करते हैं, जिससे मनमुटाव बढ़़ता है, यह होली हमें एक नई और सकारात्मक दृष्टि देने का अवसर है। होली पर गले मिलने का असली अर्थ यही है कि हम अपने मन से दूसरों के प्रति द्वेष और पुरानी कडुवाहट को पूरी तरह निकाल दें।

 

 जैसे होली की गरमा-गरम गुजिया अपने भीतर मिठास समेटे होती है, आइए हम भी अपने व्यवहार में वैसी ही मधुरता लाएं।

 

 त्यौहार हमें मौका देते हैं कि हम पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक नई शुरुआत करें।

 मेरे प्यारे बच्चों, आप समाज का भविष्य हैं; याद रखिएगा कि दूसरों की बुराई करने से मन भारी होता है, लेकिन उनकी अच्छाइयों को अपनाने और सबको साथ लेकर चलने से ही जीवन खुशहाल बनता है।

​आइए, इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं, कडुवाहट की होलिका जलाएं और गुजिया की मिठास व स्नेह के गुलाल से एक नए और उज्ज्वल कल की नींव रखें।

​शुभकामनाओं सहित:

 

​रश्मि त्रिपाठी

A.R.P. (Academic Resource Person)

 

विज्ञान विषय, ब्लॉक – चिरईगाँव

​वाराणसी

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