वाराणसी। महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली प्रेमचंद स्मारक लमही में प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट, लमही द्वारा आयोजित “सुनो मैं प्रेमचंद” कार्यक्रम के 1847वें दिवस पर उनकी प्रसिद्ध कहानी ‘फ़ातिहा’ का पाठ और समीक्षा की गई। अक्षुण्ण हिन्दी साहित्य की सदस्य समीक्षा त्रिपाठी ने कहानी का पाठ किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा कि ‘फ़ातिहा’ प्रेमचंद की उन उत्कृष्ट कहानियों में है, जिनमें रोमांच, मनोवैज्ञानिक गहराई और मानवीय संवेदना का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि तूरया जैसे जटिल और सशक्त चरित्र के माध्यम से प्रेमचंद ने मानव मन की गहरी परतों को उजागर किया है और यह दिखाया है कि कई बार जीवन में शत्रु और अपना का अंतर भी मिट जाता है।

कार्यक्रम में प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि कहानी यह भी दर्शाती है कि तथाकथित “जंगली” कहे जाने वाले लोग भी उतने ही संवेदनशील होते हैं जितने सभ्य समाज के लोग। तूरया का कैदी के बच्चों के प्रति दया दिखाना इसकी मानवीयता का प्रमाण है।

इस अवसर पर प्रसिद्ध नाटककार मोतीलाल गुप्ता के निधन पर शोक श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में सुरेश चंद्र दूबे, अशोक पांडेय, मृत्युंजय अस्थाना, अर्चना दूबे, राकेश दूबे, शंकर पांडेय सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। संचालन आयुषी दूबे ने किया तथा स्वागत राजेश कुमार श्रीवास्तव ने किया।

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