अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र में कार्यशाला का दूसरा दिन 

 

वाराणसी। मंगलवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में “द एडटेक कनेक्ट: एम्पावरिंग द ग्लोबल साउथ” विषय पर आयोजित सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन के प्रथम सत्र की शुरुआत प्रो. रमेश शर्मा, बी.बी.ए.यू., नई दिल्ली ने की। उन्होंने ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज और लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क के माध्यम से ज्ञान को सबके लिए सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्चुअल रियलिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकें शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक रोचक और अनुभव जन्य बना रही हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि मोबाइल -फर्स्ट और लो-बैंडविड्थ डिज़ाइन ग्रामीण और सीमित इंटरनेट वाले क्षेत्रों में शिक्षा को अधिक समावेशी बना रहे हैं। साथ ही, उन्होंने द्वितीय तथा तृतीय सत्र का भी संचालन किया।

द्वितीय सत्र में उन्होंने लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल सामग्री साझा करने का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच सक्रिय संवाद का मंच बन चुका है।

उन्होंने बताया कि एलएमएस के माध्यम से पाठ्य सामग्री, असाइनमेंट, क्विज़ और चर्चा मंच एक ही स्थान पर उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित बनती है। तृतीय सत्र में उन्होंने अनुसंधान संगठन और डेटा प्रबंधन उपकरणों की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए कहा कि ये उपकरण शोध कार्य को अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और सॉफ्टवेयर के माध्यम से गुणात्मक और मात्रात्मक विश्लेषण करना अब पहले की अपेक्षा अधिक सरल और प्रभावी हो गया है।

चतुर्थ सत्र में डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने रेफरेंसिंग सिस्टम और साइटेशन मैनेजमेंट टूल्स के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ओपन साइंस और रिसर्च डिसेमिनेशन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे ज्ञान का व्यापक प्रसार होता है तथा वैश्विक स्तर पर सहयोग और नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है।

इस कार्यक्रम में श्रीलंका, कम्बोडिया, घाना, किर्गिस्तान, मॉरीशस, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान, ताजाकिस्तान, और इथियोपिया 10 देशों के 24 शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं।

कार्यक्रम के निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई हैं, जबकि इसका समन्वयन डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है। सह-समन्वयक के रूप में डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। केंद्र के अन्य समस्त संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों ने भी इस अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन प्रक्रिया में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

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