
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही स्थित स्मारक पर प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा आयोजित सुनो मैं प्रेमचंद कार्यक्रम के 1854वें दिवस पर साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध साहित्यकार व कवि रामनरेश नरेश ने प्रेमचंद की चर्चित कहानी ज्वालामुखी का भावपूर्ण पाठ किया। जिसे श्रोताओं ने बड़े ध्यान और उत्साह के साथ सुना। कहानी पाठ के बाद संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद, प्रकाश कुमार श्रीवास्तव और निदेशक राजीव गोंड ने रामनरेश नरेश को सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद की कहानी ज्वालामुखी उनके “यथार्थ से परे के यथार्थ को खोजने की कोशिश का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह कहानी दर्शाती है कि प्रेमचंद केवल किसान और मजदूरों के जीवन के ही चित्रकार नहीं थे, बल्कि मानव मन की गहराइयों और आधुनिकता के दुष्प्रभावों के भी गहरे पारखी थे।
उन्होंने कहा कि यह कहानी समाज को चेतावनी देती है कि यदि शिक्षा के साथ चरित्र का विकास न हो, तो शिक्षित व्यक्ति भी खतरनाक बन सकता है। कार्यक्रम में राहुल यादव, रोहित गुप्ता, नंदलाल प्रसाद, चंदन मौर्य, विपनेश सिंह, संजय श्रीवास्तव, ऋषभ सहित आदि थे। कार्यक्रम का संचालन आयुषी दूबे, स्वागत मनोज विश्वकर्मा ने किया।
