
रिपोर्ट:- अनुपम भट्टाचार्य
वाराणसी । काशी के मानसरोवर तीर्थ क्षेत्र स्थित श्री राम तरक आंध्रा आश्रम में चल रहे श्रीराम साम्राज्य पट्टाभिषेक महोत्सव के दोनों मंडपों में शुक्रवार को रामायण का अयोध्या कांड अनुष्ठानों के केन्द्र में रहा।
एक तरफ यज्ञ मंडप में अयोध्या कांडे के सभी प्रमुख पात्रों के नाम आहुतियां समर्पित की गईं। वहीं दूसरी ओर रामालय मंडप में अयोध्या कांड के श्लोकों का अबाध पारायण भी जारी रहा।
इस सर्ग विशेष के कथानक का वर्णन करते हुए महोत्सव के मुख्य आचार्य उलीमिरी सोमायाजुलू ने बताया कि मंत्रीपरिषद ऋषि मुनियों व विद्वत जनों की एकमात्र राय के पश्चात युवराज श्रीराम के पट्टाभिषेक का निर्णय कर पाया गया। महाराज राजा दशरथ का मानना था कि इस निर्णय में अयोध्यावासियों की राय भी जुड़ी होनी चाहिए। पार्षदों ने जानकारी दी कि अयोध्या की जनता युवराज राम के राजतिलक की आशा मात्र से प्रफुल्लित है। घर-घर दीप जलाये जा रहे हैं। नगर में चतुर्दिक उत्सव का वातावरण है।
आचार्य ने बताया कि इसी बीच कैकेयी व मंथरा प्रसंग के बाद दृश्य बिलकुल बदल जाता है। बात यहां तक पहुंच जाती है कि महाराज दशरथ व राजमाता कौशिल्या भी श्री राम के साथ वन जाने को उद्दत हो जाते हैं। ऐसे में धीर पुरुष श्रीराम उन्हें समझाते व मनाते हैं। वे कहते हैं कि माता-पिता का अयोध्या में रहना ही उचित व श्रेयस्कर है।
आचार्य सोमायाजुलू ने बताया कि महोत्सव के क्रम में आज अयोध्या कांड का पारायण अनवरत जारी रहेगा। शनिवार को प्रात: इसे विराम दिया जायेगा।
उन्होंने बताया कि सायं वाल्मिकि रामायण के प्रकांड विद्वान अन्नदानम चिदम्बर शास्त्री का प्रवचन भी आयोजित है। इसके पूर्व यजमान पीठिका पर बैठे महोत्सव प्रमुख यजमान वीवी सुंदर शास्त्री ने यज्ञाचार्याें के निर्देशन में समस्त अनुष्ठान पूरे किये।
इसमें मुख्य रूप से एम श्रीनिवास राव डा भवानी शंकर , बी कृष्ण मूर्ति, एन कनक राजू , श्रीमती धारानीज ,रुक्मिणी आदि लोग रहे। सत्रों का संयोजन आश्रम के प्रबंधक वीवी सीताराम ने किया।
