वाराणसी।वसंत कन्या महाविद्यालय में महिला अध्ययन प्रकोष्ठ एवं युवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में संचालित छह दिवसीय लिंग- संवेदनशीलता अनुसंधान कार्यक्रम के अंतर्गत पांचवे दिन को दो सत्रों में कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के पहले सत्र का विषय “मीडिया और लैंगिक संवेदनशीलता” एवं दूसरे सत्र का विषय “भारतीय संदर्भ में अंतर्संबंधता की समझ: जाति , वर्ग, धर्म एवं लैंगिकता” का आयोजन किया गया।

कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने शुभकामनाएं भी दी।

प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में श्री अशोक कुमार पाण्डे (सहायक निर्देशक, आकाशवाणी )उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता का स्वागत अनुराधा बापुली द्वारा किया गया। इन्होंने मीडिया के विभिन्न माध्यमों में लैंगिक संवेदनशीलता के महत्व पर चर्चा की।

सत्र के दौरान वक्ता ने मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया कि मीडिया समाज का दर्पण है, इसलिए समाचारों की रिपोर्टिंग और विज्ञापनों में ‘जेंडर न्यूट्रलिटी’ (लैंगिक निष्पक्षता) का होना अनिवार्य है। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से छात्राओं को यह समझाया कि किस प्रकार जिम्मेदार पत्रकारिता समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।

द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. पद्मिनी रवींद्रनाथ(अर्थशास्त्र विभाग ,महिला महाविद्यालय) उपस्थित रहीं। प्रो. पद्मिनी ने अपने व्याख्यान में भारतीय समाज की विविधताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किसी भी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति केवल उसके जेंडर से निर्धारित नहीं होती, बल्कि उसकी जाति, वर्ग, धर्म एवं लैंगिकता भी उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्राओं को सामाजिक भेदभाव के प्रति सजग रहने तथा समानता और सम्मान की भावना को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

दोनों सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रभावशाली रहे। छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की तथा प्रश्न-उत्तर सत्र में अपनी जिज्ञासाएँ भी व्यक्त कीं।

कार्यशाला का सफलतापूर्वक संयोजन डॉ अनुराधा बापुली तथा संचालन अनन्या पाण्डे ( स्नातक प्रथम वर्ष) द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यशाला के आयोजन समिति के सदस्य जिनमें डॉ. मालविका, डॉ. प्रियंका, डाॅ. पूर्णिमा सिंह, डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव, डॉ. प्रतिमा सिंह आदि उपस्थित रहे।

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