
रिपोर्ट:- अनुपम भट्टाचार्य
वाराणसी। श्री मानसरोवर तीर्थ क्षेत्र के श्री रामातरक आंध्र आश्रम प्रांगण में चल रहे श्री राम साम्राज्य पट्टाभिषेक महोत्सव के पांचवें दिन के अनुष्ठान वानर राज सुग्रीव की महत्ता के नाम समर्पित रहे।
महोत्सव के यज्ञ मंडप में सोमवार को वानर प्रमुख के नाम से विशेष आहुतियां समर्पित की गई। रामालय मंडप में भी श्री राम- हनुमान मिलन व सुग्रीव राज्याभिषेक की चर्चा के साथ वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड के पारायण को विश्राम दिया गया।
सर्ग विशेष की महत्ता को रेखांकित करते हुए महोत्सव के मुख्य आचार्य श्री उलीमिरी सोमायाजुलू ने बताया कि देवी जानकी की खोज में निकले श्री राम प्रभु व लक्ष्मण की हनुमान जी से पहली भेंट ऋष्यमूक पर्वत पर हुई और रघुवीर पहली ही भेंट में पवन पुत्र के विनय, विवेक व विद्वता से प्रभावित हो गए।
आचार्य सोमायाजुलू ने कहा कि वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड में श्री राम-हनुमान मिलन सुग्रीव मैत्री सहित वानर राज के राज्याभिषेक का भावपूर्व वर्णन किया गया है।
आचार्य ने बताया कि यह पवन पुत्र का ही प्रयास था कि श्री राम जी की सुग्रीव से मैत्री हुई और उनका नाम रामायण में श्री राम प्रभु के मित्र के रूप में हमेशा के लिए प्रातः स्मरणीय हो गया।
उधर महोत्सव के यज्ञ मंडप में वैदिक विद्वानों ने वाल्मीकि रामायण के अध्याय विशेष में लिखित सभी पुण्यश्लोक पत्रों को आहुतियाँ प्रदान की। यज्ञ के मुख्य यजमान तथा श्री राम तारक आंध्र आश्रम के मैनेजिंग ट्रस्टी वीवी सुंदर शास्त्री ने श्रद्धा व भक्ति पूर्वक सभी अनुष्ठान संपादित किए। दोनों ही मंडपों के सभी सत्रों का संयोजन आश्रम के प्रबंधक वीवी सीताराम ने किया।
इसमें मुख्य रूप से एम वी प्रकाश राय, पी रमेश, बी कृष्ण मूर्ति,श्रीमती कंडाला सत्यवानी, पप्पू कृष्ण प्रसाद, मंडपाका अंजनेय मूर्ति आदि लोग रहे।
