वाराणसी।वसन्त कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी में संस्कृत विभाग द्वारा संस्कृतमातृमण्डलम् के अन्तर्गत आयोजित पन्द्रहदिवसीय छन्दोऽभ्यास कार्यशाला सम्पन्न हुई। समापन समारोह भारतीय जनमानस के त्रिकालाबाधित पुरोधा पुरुषोत्तम श्रीराम को समर्पित रहा।

इस सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का शुभारम्भ मङ्गलाचरण के रूप में ‘राम रतन धन पायो’ भजन की अत्यन्त भावपूर्ण एवं नादात्मक प्रस्तुति से हुआ, जिसे प्रो. मीनू पाठक, विभागाध्यक्षा, वाद्य संगीत विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया। उनकी मधुर स्वर लहरियों ने उपस्थित जनसमुदाय को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।

तत्पश्चात् स्वागत वक्तव्य डॉ. शान्ता चटर्जी, विभागाध्यक्षा, संस्कृत विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक अभिनन्दन करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उसके महत्व पर प्रकाश डाला।इसके पश्चात् शास्त्रीय नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष की छात्रा प्रतिष्ठा द्वारा दी गई, जिसने अपनी अभिव्यक्ति, ताल एवं लय के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।कार्यक्रम का अगला आकर्षण ‘श्रीराम स्तुति’ रहा,। संस्कृतमातृमण्डलम् की अध्यक्षा डॉ. कमला पाण्डेय के निर्देशन में प्रशिक्षित छात्राओं द्वारा सामूहिक रूप से सभी गेय छन्दों में प्रस्तुत किया गया।

इस प्रस्तुति में कार्यशाला की संयोजिका डॉ. मञ्जू कुमारी, सहायक आचार्या ने सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए पूरे कार्यक्रम को सुसंगठित एवं प्रभावी ढंग से संचालित किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. तुलसी कुमार जोशी, सहायक आचार्य, वसन्त महिला महा विद्यालय, राजघाट, वाराणसी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में गुरुमुख से प्राप्त शिक्षा को प्रभावकारी बताते हुए उसकी महत्ता पर बल दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विदुषी प्रो. मञ्जु सुन्दरम, पूर्व विभागाध्यक्षा, संगीत विभाग द्वारा की गई।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए छन्दों को जीवन में मति, अभिव्यक्ति और गति देकर जीवन को सार्थक बनाने का साधन बताया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री सुधा चौबे तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ.प्रियंका पाठक ने किया।

कार्यक्रम में सभी शिक्षिकाओं सहित लगभग पचास छात्राओं की उपस्थिति रही ।

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