रिपोर्ट :-अनुपम भट्टाचार्य 

वाराणसी। काशी के मानसरोवर तीर्थ क्षेत्र में चल रहे श्री रामराज्य पट्टाभिषेक महोत्सव के छठवें दिन की विशिष्ट आहुतियां पवन पुत्र हनुमान जी की यशोगाथा को समर्पित रहीं।

पट्टाभिषेक अनुष्ठान के समानांतर रामालय मंडप भी वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड के सुंदर श्लोकों के घोष से गूंजता रहा।

यज्ञ महोत्सव के मुख्य आचार्य उलिमिरी सोमयाजुलू ने बताया कि वाल्मीकि रामायण के इस सर्ग विशेष में सब कुछ सुंदर-सुंदर है। अतएव इस सर्ग का नाम करण भी वाल्मीकि जी ने सुंदर कांड ही कर दिया है।

उन्होंने इसका उदाहरण भी दिया।बताया कि सीता माता की खोज में निकले पवन पुत्र हनुमान ने अशोक वाटिका में अशोक वृक्ष पर बैठे-बैठे माता जानकी को विश्वास दिलाने के लिए भी राम प्रभु के सौंदर्य का जो नख- शीख वर्णन किया उससे बड़ा सुंदर त्रैलोक्य में भला और क्या हो सकता है।

दूसरी तरफ लंका दहन के पश्चात मां जानकी की चूड़ामणि ले कर लंका से वापस हुए हनुमान प्रभु श्री राम जी को वैदेही के संतीत्व उनकी सुंदरता का त्रैलोक्य में भला कोई जोड़ हो सकता है क्या ? कपि की शूरवीरता से रोमांचित रघुवीर ने जिस तरह उन्हें गले से लगाया। वह तो शायद समूची सृष्टि का सबसे सुंदरतम दृश्य रहा होगा।

आज देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए रामायण मर्मज्ञों ने ग्रंथ के सुंदरकांड के संपूर्ण पारायण को विश्राम दिया। बुधवार को लंका कांड का संपूर्ण पारायण किया जाएगा।

उत्सव के यज्ञ मंडप के समस्त उतुष्ठान यज्ञ के मुख्य यजमान वी वी सुंदर शास्त्री ने पूरे किए।

संयोजकता आश्रम के प्रबंधक वी वी सीताराम का रहा।

इस अवसर पर मुख्य रूप से सी वी बी सुब्रह्मण्यम, बुधा शर्मा, श्याम शास्त्री, एन रामचंद्र मूर्ति, श्रीमती वेमुरी उमा,धारणिया, रुक्मिणी जी उपस्थित रहे।

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