वाराणसी। अस्सी क्षेत्र स्थित श्री काशी धर्मपीठ रामेश्वर मठ से मंगलवार को श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह के अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जो रामेश्वर मठ से प्रारंभ होकर अस्सी घाट तक पहुंची। यात्रा में सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भक्ति भाव से भजन-कीर्तन करते हुए भाग लिया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

इस अवसर पर अनंत श्रीकाशीधर्म पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज के श्रीमुख से अमृतमयी श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ, जिसे सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

कथाव्यास पूज्यपाद अनंतश्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीमद्भागवत की रचना सच्चिदानंद भाव एवं सद्भावना की स्थापना के लिए की गई है। इसका उद्देश्य मानव हृदय में श्रद्धा, भक्ति और प्रेम जागृत कर विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना है।

उन्होंने बताया कि देवर्षि नारद की प्रेरणा से वेदव्यास जी ने लोकमंगल हेतु भागवत की रचना की। भागवत के मुख्य श्रोता राजा परीक्षित थे, जिन्हें सात दिन में मृत्यु का श्राप मिला था। ऐसे समय में श्री सुखदेव जी द्वारा भागवत श्रवण से उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ।

इस पावन अवसर पर मुख्य यजमान देवमणि शुक्ला जी (मिर्जापुर) उपस्थित रहे। साथ ही आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज, मनोज मिश्रा, विनय तिवारी एडवोकेट, वंशी शुक्ला, योगेश चंद्र यादव, पंकज शास्त्री, वंदना त्रिपाठी, सागर गर्ग, अनुज मिश्रा सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

कलश यात्रा के माध्यम से क्षेत्र में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश प्रसारित किया गया। आयोजन की भव्यता और श्रद्धालुओं के उत्साह ने इसे अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायक बना दिया।

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