
विशेष रिपोर्ट भुवनेश्वर से
भुवनेश्वर। देश में तकनीकी कौशल विकास और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा सेंट्रल टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर (सीटीटीसी) न केवल युवाओं को रोजगार के लिए तैयार कर रहा है, बल्कि भारत के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष और एयरोस्पेस कार्यक्रमों में भी अपना योगदान दे रहा है।
1991 में स्थापित यह संस्थान भारत सरकार और डेनमार्क सरकार के सहयोग से शुरू किया गया था, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत सहयोग भारत और 40 प्रतिशत सहयोग डेनमार्क का रहा। संस्थान के सीईओ एल राजशेखर ने बताया कि सीटीटीसी का मुख्य उद्देश्य युवाओं को तकनीकी कौशल प्रदान करना, उद्योगों को तकनीकी सहायता देना और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
संस्थान अब तक 56 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दे चुका है। खास बात यह है कि यहाँ स्कूल छोड़ चुके युवाओं और समाज के कमजोर वर्गों को भी प्रशिक्षण दिया जाता है। स्लम क्षेत्रों में भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनमें मोटरसाइकिल रिपेयरिंग और वॉशिंग मशीन रिपेयरिंग जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाए जाते हैं। प्रशिक्षण का मॉडल 80 प्रतिशत प्रैक्टिकल और 20 प्रतिशत थ्योरी पर आधारित है, जिससे प्रशिक्षित युवाओं को उद्योगों में आसानी से रोजगार मिल सके।
सीटीटीसी में देश के 26 राज्यों से युवा प्रशिक्षण लेने आते हैं। कई प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रायोजित होते हैं, जबकि कुछ में प्रतिभागियों को स्वयं भी योगदान देना पड़ता है। संस्थान केवल छात्रों को ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षकों को भी आधुनिक तकनीकों से अपडेट रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है।एल राजशेखर ने बताया कि उन्नत तकनीकी क्षमता के कारण यह संस्थान देश के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भी योगदान दे रहा है। **Chandrayaan‑3 मिशन के लिए लगभग 54 महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स सीटीटीसी में तैयार किए गए। इसके अलावा आगामी मानव अंतरिक्ष मिशन Gaganyaan के लिए भी संस्थान कार्य कर रहा है।
एयरोस्पेस क्षेत्र में भी सीटीटीसी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संस्थान ने भारतीय विमानन परियोजनाओं के लिए कई उपकरण और कंपोनेंट्स विकसित किए हैं, जिनका उपयोग HAL Tejas जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों से जुड़े कार्यों में किया जा रहा है।
कोविड-19 महामारी के दौरान भी संस्थान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए आवश्यक मेडिकल उपकरणों के कंपोनेंट्स और मास्क का निर्माण किया।
संस्थान के विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी प्रशिक्षण और अत्याधुनिक विनिर्माण क्षमता के कारण सीटीटीसी देश में कौशल विकास और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
