रिपोर्ट :-सन्तोष कुमार चतुर्वेदी 

 

बिहार।कैमूर अखण्ड भारत के निर्माता सम्राट अशोक महान एक महान योद्धा ही नहीं बल्कि योद्धाओं के सिरमौर थे। अपने जीवन में एक भी युद्ध नहीं हारे। चाहते तो पूरी दुनिया जीत सकते थे लेकिन एक ऐसा कलिंग युद्ध हुआ जो उनकी सोच को बदल दिया और आजीवन बौद्ध धर्म के प्रचारक बन गए।चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान की गणना विश्वस्तरीय सम्राटों में की जाती है। उनकी महानता उनके साम्राज्य की विशालता,उनकी सेना की अजेयता, उनकी शासन की सुदृढ़ता में नहीं पायी जाती है बल्कि उनकी महानता, अलौकिक व्यक्तित्व,अगाध धर्मपरायणता, धार्मिक विचारों की उदारता, सिद्धांतों तथा आदर्शों की उच्चता, राष्ट्र निर्माण की योजनाओं, साहित्य तथा कला की अपूर्व सेवाओं तथा धम्म विजय में पायी जाती है। समस्त मानव समाज तथा समस्त विश्व के समस्त प्राणियों के कल्याण की विराट चेष्टा उन्हें न केवल भारत बल्कि सम्पूर्ण विश्व के महान सम्राटों के मध्य सर्वोत्कृष्ट स्थान प्रदान करती है।

उक्त विचार सम्राट अशोक जयंती पर सम्राट अशोक चेतना मंच के राष्ट्रीय संयोजक प्रो.(डॉ.) दिनेश कुशवाहा ने कहा।

सम्राट अशोक के जीवन का लक्ष्य लोक कल्याण,भौतिक,नैतिक तथा आध्यात्मिक उन्नति था। उन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सदा प्रयासरत रहे।ऐसे उच्चादर्शी सम्राट को कौन ऐसा कृतघ्न होगा जो ऐसे महान सम्राटों की कोटि में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्रदान नहीं करेगा। सम्राट अशोक को इतिहासकारों ने इतिहास में उचित स्थान नहीं दिया है जो काफी सोचनीय है।

बिहार सरकार के यशस्वी एवं लोकप्रिय मुख्यमंत्री माननीय श्री नीतीश कुमार जी को बहुत- बहुत आभार एवं बधाई जिन्होंने सम्राट अशोक जयंती को राजकीय अवकाश घोषित किया है।

भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से मांग करता हूं कि सम्राट अशोक जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर सम्राट अशोक के साथ न्याय करें तथा पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र किया जाय।

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