
चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान की वाराणसी शाखा का आयोजन, बैंक ऑडिट प्रक्रिया और जोखिम प्रबंधन पर हुई चर्चा
वाराणसी। द इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की वाराणसी शाखा द्वारा शनिवार को महमूरगंज स्थित होटल बालाजी पैलेस में “बैंक ऑडिट” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शाखा अध्यक्ष सीए वैभव मेहरोत्रा ने किया। सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में आयकर विभाग की आईआरएस अधिकारी कात्यायनी भाटिया, पंजाब नेशनल बैंक के जनरल मैनेजर दीपक सिंह तथा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया वाराणसी के डीजीएम शैलेन्द्र कुमार उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शाखा के वरिष्ठ सदस्य सीए विनय कुमार जैन तथा पूर्व अध्यक्ष सीए अजय कुमार मिश्रा ने की। संचालन सीए मयूख दवे और सीए हर्ष भूरा ने किया। प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता सीए राघवेन्द्र गोयल ने एलएफएआर (लॉन्ग फॉर्म ऑडिट रिपोर्ट) की रिपोर्टिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एलएफएआर बैंक की वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित एक विस्तृत रिपोर्ट होती है, जिसमें बैंक की संपत्ति, देयता, आय, व्यय और अन्य वित्तीय पहलुओं का विवरण शामिल होता है। इसमें ऑडिटर की राय, ऑडिट के दौरान सामने आए मुद्दे तथा उनके समाधान के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया जाता है। साथ ही उन्होंने बैंक के जोखिम प्रबंधन की नीतियों, प्रक्रियाओं और नियंत्रणों पर भी प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र के वक्ता सीए अनीरुद्ध तिवारी ने एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) के वर्गीकरण और आईआरएसी (इनकम रिकॉग्निशन एंड एसेट क्लासिफिकेशन) के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आईआरएसी ऑडिट का उद्देश्य बैंकों की आय और संपत्ति की गुणवत्ता का मूल्यांकन करना होता है। इसके अंतर्गत ऑडिटर ऋण की गुणवत्ता, बकाया अवधि, वसूली की संभावना और ऋण की सुरक्षा का आकलन करते हैं। प्रथम सत्र में धन्यवाद ज्ञापन शाखा सचिव सीए रंजीत कुमार पांडेय तथा द्वितीय सत्र में शाखा कोषाध्यक्ष सीए नमन कपूर ने किया। इस अवसर पर शाखा उपाध्यक्ष सीए विकास द्विवेदी, कार्यकारिणी सदस्य सीए श्रीप्रकाश पांडेय, पूर्व अध्यक्ष सीए नीरज कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में चार्टर्ड एकाउंटेंट सदस्य उपस्थित रहे।
