वाराणसी। डाफी स्थित कमला आर्शीवाद वाटिका में चल रहे नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथा का अमृत पान करते हुए देवी उपासिका साध्वी गीताम्बा तीर्थ ने मां कुष्मांडा देवी के चरित्र का वर्णन करते हुए कहां के राजा सुदर्शन की भक्ति से प्रसन्न होकर मां दुर्गा। काशी के दुर्गाकुंड क्षेत्र में प्रगट हुई। कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि अयोध्या के राजा ध्रुव संधि थे। ध्रुव संधि की दो पत्नियों थी। बड़ी पत्नी का नाम मनोरमा और छोटी का नाम लीलावती था। बड़ी महारानी के पुत्र का नाम सुदर्शन था और लीलावती के पुत्र का नाम शत्रुजीत था। एक बार ध्रुव संधि जंगल में सिंह का शिकार कर रहे थे इस दौरान सिंह ने उन पर हमला कर दिया जिसमें उनकी मौत हो गई। राजा ध्रुव संधि के मौत के बाद महारानी मनोरमा एवं महारानी लीलावती के पिता के बीच अपने नातियो को राजा बनाने के लिए युद्ध छिड़ गया। युद्ध में महारानी मनोरमा के पिता मारे गए और और रानी पुत्र सुदर्शन को लेकर प्रयागराज महर्षि भारद्वाज के आश्रम में आकर सरण ली। जहां पर भारद्वाज ऋषि ने महारानी मनोरमा को श्रीमद् देवी भागवत का पारायण करने की बात कही। महारानी मनोरमा के साथ उनके पुत्र सुदर्शन भी आदि शक्ति की आराधना आश्रम में करने लगे। इसी दौरान एक तीर्थ यात्री काशी नरेश सुबाहू की बेटी शशिकला के पास पहुंचा और बताया कि आपके लायक राजकुमार प्रयागराज में महर्षि भारद्वाज के आश्रम में है। इस बात को सुनकर राजकुमारी शशिकला ने अपने पिता से कह कर स्वयंवर रचाया स्वयंवर में मनोरमा के पुत्र सुदर्शन और लीलावती के पुत्र शत्रुजीत भी पहुंचा लेकिन राजकुमार सुदर्शन ने स्वयंवर जीत कर राजकुमारी शशिकला का वरण किया । इससे क्रोधित होकर शत्रुजीत नें काशी नरेश सुबाहु के राज्य पर हमला कर दिया और पूरे राज्य को तहस-नस कर दिया । अपनी हर देखकर राजकुमार सुदर्शन ने मां आदि शक्ति से प्रार्थना की। राजा सुदर्शन की भक्ति से मां आदिशक्ति प्रकट हुई और शत्रुजीत को मार कर उसकी सेना को भी खत्म कर दिया और राजकुमार सुदर्शन को काशी का राजा बनाया। इसके बाद मां आदिशक्ति ने राजा सुदर्शन से कहा कि मैं तुम्हारे भक्ति से प्रसन्न हूं कोई वर मांगो तो राजा सुदर्शन ने कहा कि मां आप यही काशी में निवास करें और भक्तों का दुख दूर करें तो मन प्रसन्न होकर दुर्गाकुंड क्षेत्र में मां कुष्मांडा के रूप में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रही है और उनका कष्ट भी दूर कर रही है। साध्वी गीताम्बा ने कहा कि जो भी भक्त मां कुष्मांडा का भाव पूर्वक दर्शन पूजन करता है मां उसकी सभी मनोकामनाएं तो पूरी ही करती हैं उनके दुख को भी दूर करती है। कथा के अंत में आरती कर भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया।

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