
वाराणसी । डाफी स्थित कमला आर्शीवाद वाटिका में चल रहे नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत कथा के छठवें दिन गुरुवार को कथा का अमृत पान करते हुए देवी उपासिका साध्वी गीताम्बा तीर्थ ने. कहां की स्त्री का अपमान करने से बहुत बड़ा पाप लगता है और इस पाप का प्रायश्चित भगवान को भी करना पड़ता है ।
कथा का वर्णन करते हुए देवी उपासिका साध्वी गीताम्बा ने कहा पापी जालंधर का को करने के लिए भगवान विष्णु उसके पतिब्रता पत्नी वृंदा सती का सतीत्व का नास भगवान विष्णु उसके पति जालंधर के रूप में उसके घर जाकर किया। जब यह बात बृँदा सती को पता चला तो उन्होंने श्राप दिया की जिस तरह आप मेरे पास आकर 14 दिन अपने को मेरे पति जालंधर के रूप में सिद्ध करने में लगाये। मै आपको श्राप देती हूं कि आपको 14 वर्ष का वनवास मिलेगा और 6 महीने मेरे साथ आप रहे तो आपकी भी पत्नी को 6 महीने तक मेरे पति जालंधर जो दूसरे जन्म में रावण बनें उनके साथ उनके राज्य में रहना पड़ेगा। वृंदा सती के साथ किए गए पाप का प्रायश्चित भगवान विष्णु को राम जन्म लेकर प्रायश्चित करना पड़ा। जब रावण का वध नहीं हो पा रहा था तो भगवान राम ने देवी भागवत पारायण किया उसके बाद मां आदि शक्ति के आशीर्वाद से रावण का वध हो पाया।
उन्होंने कहा कि आदिशक्ति शक्ति से ही देवता राक्षसों पर विजय प्राप्त करते हैं। मां आदिशक्ति की कृपा जिस पर हो जाए वह सभी सुखों की प्राप्ति करता हैं।
