
वाराणसी। कमच्छा स्थित वसंत कन्या महाविद्यालय में इतिहास विभाग के छात्र क्लब इतिवृत (कैटलिस्ट) द्वारा इंटर कॉलेज वाद-विवाद प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘मध्य पूर्वी संकट: दृष्टिकोणों का संघर्ष’ पर आधारित रहा । इस कार्यक्रम को ‘काया फाउंडेशन’ द्वारा प्रायोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया तत्पश्चात विभागाध्यक्ष प्रो पूनम पांडे द्वारा स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया गया। यह प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की गई।
पहला चरण परंपरागत बाद विवाद चरण था एवं द्वितीय चरण नीति निर्माण से संबंधित रहा। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो रचना श्रीवास्तव ने पश्चिमी एशिया की राजनीति को केंद्र में रखते हुए भारत की तटस्थता की नीति के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने इतिहास विभाग एवं छात्र क्लब के इस सफल आयोजन की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं।
प्रो केशव मिश्रा ने समकालिक वैश्विक राजनीति के इस उथल पुथल भरे दौर में वास्तविक राजनयिक नेतृत्व के अभाव पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से एशियाई प्रतिक्रियाओं को समझने के संदर्भ में “थिंक ग्लोबल एक्ट लोकल” की अवधारणा का समर्थन किया। वहीं डॉ. श्रुति ने भारत की नैतिक विदेश नीति की परंपरा पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में यही दृष्टिकोण मार्गदर्शक होना चाहिए
प्रथम चरण के निर्णायक प्रो संजीव कुमार (इतिहास विभाग), प्रो विनोद चौधरी (इतिहास विभाग, DAV) तथा प्रो इंदु उपाध्याय (अर्थशास्त्र विभाग, VKM) थे। वहीं दूसरे चरण में प्रो केशव मिश्रा (पूर्व विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग, काशी हिंदू विश्विद्यालय), प्रो रचना श्रीवास्तव (प्राचार्य, वसंत कन्या महाविद्यालय) तथा डॉ. श्रुति दुबे (राजनीति विज्ञान विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय) सम्मिलित रहे।
इस प्रतियोगिता में विभिन्न महाविद्यालयों एवं संकायों के कुल 40 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शिवांग पाल, द्वितीय स्थान प्रियंका रजवार तथा तृतीय स्थान वैष्णवी ने प्राप्त किया। विजेताओं को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में छात्र क्लब के सदस्यों सौम्या त्रिपाठी,पंखुड़ी अरोरा, विभा,मानविका, मनीषा, श्रद्धा,सुगंधा,वृद्धि, सिद्धि, शालिनी, जीत, मुस्कान, विजयश्री आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ शशिकेश कुमार गोंड द्वारा किया गया। इस अवसर डॉ निरंजना श्रीवास्तव, डॉ श्वेता सिंह, डॉ अनुजा त्रिपाठी एवं सुश्री रणनीति राय सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।
