वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली प्रेमचंद स्मारक लमही में जिला प्रशासन की प्रेरणा से प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा आयोजित सुनो मैं प्रेमचंद कार्यक्रम के 1875वें दिवस पर उनकी प्रसिद्ध कहानी ‘शांति’ का पाठ किया गया। कहानी का पाठ कवयित्री डॉ. निकेता सिंह ने किया। संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद और निदेशक राजीव गोंड ने डॉ. निकेता सिंह को सम्मानित किया। प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि ‘शांति’ ऐसी कहानी है जो पाठक को केवल भावुक ही नहीं करती, बल्कि गहरे चिंतन के लिए भी प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि जब आदर्श, मर्यादा और आत्मसम्मान का टकराव यथार्थ से होता है तो परिणाम अक्सर त्रासदी के रूप में सामने आता है।

उन्होंने कहा कि गोपा की “शांति” वास्तव में उस पीड़ा की पराकाष्ठा है, जहाँ आँसू भी सूख जाते हैं। कार्यक्रम में सर्वेंद्र, पं. अरुण कुमार द्विवेदी, रंजीत कुमार राय, अंशुल, आयुषी, अनुज चौरसिया, अभिषेक, संतोष कुमार, मनोज विश्वकर्मा, राहुल विश्वकर्मा, प्रमोद कुमार, विपनेश सिंह और सुरेश चंद्र दूबे सहित कई साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। संचालन समीक्षा त्रिपाठी ने किया, जबकि स्वागत रोहित गुप्ता ने किया।

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