
वाराणसी। संगीत ही एक ऐसा माध्यम है जो दिलों से दिलों को जोड़ता है । ईश्वर भक्ति का सुगम साधन है और इसके माध्यम से ही हम अपने जीवन को आनंदित बना सकते हैं कहा भी जाता है कि भगवान के मिलने का संगीत भी एक माध्यम बन सकता है।
काशी में श्री हनुमान जी महाराज के जन्मोत्सव पर श्री संकट मोचन मंदिर में प्रतिवर्ष संगीत समारोह होता है। इस बार 103 वां वर्ष है। यहां तक की जब कोरोना काल में पूरे देश जब में संगीत साधना सार्वजनिक मंचों से बंद था तो उस समय भी श्री संकट मोचन मंदिर में संगीत समारोह हुआ क्योंकि यह संगीत समारोह कहने को तो आम जनमानस के लिए है लेकिन इसके सबसे बड़े श्रोता पवन पुत्र हनुमान जी होते है ।
यहां कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देने नही हाजिरी लगाने आते है । देश-विदेश के कलाकार हनुमान जी के चरणों में अपनी भावांजलि देकर धन्य होते हैं और हो भी क्यों नहीं इस मंच पर प्रस्तुति देने वाला यहां से निकलने के बाद यश कीर्ति से सुशोभित होता है ऐसा इस दरबार की सिद्धि है। काशी के लोगों को भी इस संगीत के माध्यम से देश-विदेश के बड़े कलाकारो को सुनने व देखने का मौका मिल जाता है क्योंकि यही कलाकार जब बाहर कार्यक्रमों की प्रस्तुति देते हैं तो वह आम जनता के पहुंच से बाहर होता है। आम जनता नहीं इनको सुन सकती है और ना देख सकती है। इस बार इस संगीत समारोह के शुरू होने से पहले कुछ तथाकथित लोगो द्वारा बेसिर पैर की बाते कही जाने लगी है। इन लोगों का कहना है कि इस संगीत समारोह में पाकिस्तान से कलाकार आकर अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं जो पूरी तरह से निराधार है इस संगीत समारोह में देश के बड़े और ख्यातिलब्ध हिन्दू व मुस्लिम कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे और वह भी हनुमान जी के चरणों में अपनी भावांजलि देकर धन्य होंगे और इसमें कहीं से कोई गलत परंपरा नहीं शुरू हो रही है ये मंदिर में शुरू से ही चलता आ रहा है और मुस्लिम कलाकार होना कोई गुनाह तो नहीं है संगीत का कोई मजहब या धर्म नहीं होता होता है। कुछ वर्ष पहले जब पाकिस्तान से गुलाम अली आए थे और संकट मोचन मंदिर में अपनी प्रस्तुति दिए उसको लेकर भी कुछ लोगों ने हंगामा खड़ा किया था लेकिन हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री और देश व सबसे विश्व के सबसे प्रसिद्ध नेता जनता के दिलों में राज करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा था कि हमारे देश खासकर काशी के संकट मोचन मंदिर में प्रेम और भाईचारे की मिसाल पेश की गई जहां पर गुलाम अली ने अपनी प्रस्तुति दी। काशी ने हमेशा प्रेम और भाईचारे का संदेश ही दिया है। संगीत को संगीत ही रहने दीजिए इसकी कोई जाति मजहब नहीं होती है । सबका स्वागत है संकट मोचन हनुमान जी के दरबार में, आईये और संगीत के गंगा में खूब गोता लगाइए।
प्रस्तुति – रामयश मिश्र
