वाराणसी। कमच्छा स्थित वसंत कन्या महाविद्यालय, में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के थिएटर क्लब ‘रंगमंच’ द्वारा अपनी पहली वर्षगांठ के उत्सव ‘रंगोत्सव’ का आयोजन दिनांक 8 और 9 अप्रैल को विभिन्न प्रतियोगिताओं और प्रस्तुतियों के मंचन के रूप में किया गया है।

पहले दिन, 8 अप्रैल को एकल अभिनय, एकांकी और शॉर्ट फिल्म वर्गों में प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ।

जिनमें निर्णायक के रूप में डॉक्टर शांता चटर्जी, प्रोफेसर निहारिका लाल, डॉक्टर सुप्रिया सिंह, डॉक्टर प्रीति विश्वकर्मा ने छात्राओं की प्रभावपूर्ण प्रस्तुतियों में से विजेताओं का चयन किया। छात्राओं ने रंगमंच की गरिमा के अनुरूप बहुविध विषयों को कलात्मक और तकनीकी कुशलता से मंचित किया।

कथ्य के रूप में बाल-यौन हिंसा, रानी लक्ष्मीबाई का पराक्रम, लावणी नृत्य की सामाजिक बाध्यता और रूदाली जैसे विषय रहे। शॉर्ट फिल्म वर्ग के अंतर्गत पहली बार आयोजित प्रतियोगिता में छात्राओं को कल्पना और लेंस का विस्तृत आयाम मिला और कहानी कहने की इलेक्ट्रॉनिक विधा में रोचक तथा भावपूर्ण प्रविष्टियां प्राप्त हुईं।

प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने कहा कि क्लब रंगमंच महाविद्यालय के सर्जनात्मक क्रियाशीलता का अनूठा प्रयोग है। क्लब की संयोजक छात्राओं के प्रति अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने उनके उज्जवल और ऊर्जान्वित भविष्य की कामना की। प्रबंधक श्रीमती उमा भट्टाचार्या ने उपस्थित सभा को आशीर्वचन दिया। विशेष अतिथि डॉक्टर शांता चटर्जी ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जहां निर्बाध, प्रभावपूर्ण और संतुलित हो वही रंगमंच है। महाविद्यालय में ऐसे प्रकोष्ठ को किसी प्रेशर-वॉल्व की तरह देखना चाहिए जिसके माध्यम से रचनात्मक ऊर्जा को सही दिशा में नियोजित किया जा सकता है।

दूसरे दिन, 9 अप्रैल के कार्यक्रमों में रंगमंच क्लब की विशेष नाट्य प्रस्तुति ‘जीवा, तुम कब आओगे!’ मुख्य आकर्षण का केंद्र होगी।

इस नाटक का लेखन महाविद्यालय में अंग्रेजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुप्रिया सिंह ने किया है। मंच-संचालन अदिति मिश्रा ने किया तथा संयोजन नैरंजना श्रीवास्तव का रहा। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक उपस्थित रहे।

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