रिपोर्ट उपेन्द्र कुमार पांडेय 

आजमगढ़। होमियोपैथी के जनक डा. किश्चयन फैड्रिक सैम्युल हैनिमन की 271वीं जयंती शुक्रवार को शहर के बदरका स्थित प्रतिभा निकेतन इंटर कालेज में विश्व होमियोपैथी दिवस के रूप में धूमधाम से मनाई गई।

इस दौरान डा. हैनिमन के कृतित्व व व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की गई। महिला चिकित्सकों एवं बच्चों ने केक काटकर जन्मदिन मनाया। इस दौरान होमियोपैथी को विश्व के लिए वरदान करार दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राजकीय श्री दुर्गा जी होमियोपैथिक मेडिकल कालेज आजमगढ़ के प्राचार्य डा. एसके पांडेय, जिला होमियोपैथिक चिकित्साधिकारी डा. योगेंद्र कुमार यादव, क्रेंद्रीय होमियोपैथी परिषद के पूर्व सदस्य एवं नेशनल इंस्टीट्यूट आफ होमियोपैथी कोलकाता के सदस्य डा. भक्तवत्सल तथा लायंस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव, हमाई अध्यक्ष डा. राजकुमार राय, सचिव सीजी मौर्य ने डा. हैनिमन की प्रतिमा पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान होमियोपैथी चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले चिकित्सकोें को अंगवस्त्रम व मोमेंटो भेंटकर सम्मानित किया गया।

राजकीय श्री दुर्गा जी होमियोपैथिक मेडिकल कालेज आजमगढ़ के प्राचार्य डा. एसके पांडेय ने कहा कि प्रेरणात्मक व्यक्तित्व की उपलव्धियों और राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान, दर्शन तथा सिद्धातों के प्रति जन चेतना के लिए अनेक विश्वदिवसों का आयोजन किया जा रहा है। होमियोपैथी के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए आवश्यक है कि वर्ष का एक दिन डा. हैनीमन के जन्मदिवस दस अप्रैल से अच्छा कोई दिवस नहीं हो सकता। अतः इस दिन को विश्व होमियोपैथी दिवस के रूप में मनाया जाना प्रासंगिक है।

जिला होमियोपैथिक चिकित्साधिकारी डा. योगेंद्र कुमार यादव ने कहा कि मन को स्वस्थ्य रखकर ही काया को स्वस्थ रखा जा सकता है। हैनीमन के सिद्धांतों पर चलकर सतत अभ्यास द्वारा अनेक असाध्य रोंगो का उपचार इस पैथी द्वारा सहजता से किया जा सकता है। हमाई अध्यक्ष डा. राजकुमार राय ने कहा कि होमियोपैथी को जन जन तक पहुंचाना ही संगठन का उद्देश्य है। इसके लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। डा. भक्तवत्सल ने कहा कि डा. हैनीमन ने पीड़ित मानवता के लिए होमियोपैथी के रूप में एक अमोदघ अस्त्र प्रदान किया है जिससे असाध्य रोगों का उपचार कम खर्च में सभंव है। उन्होनेें कहा कि पूरे देश में 300000 से ज्यादा होम्योपैथिक चिकित्सक, 85000 सरकारी डिस्पेंसरी और लगभग 200 से ज्यादा होम्योपैथिक मेडिकल कालेज चल रहे हैं। केन्द्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान संस्थान के 35 शोध संस्थान चल रहें हैं और लगभग दस करोड़ से ज्यादा लोग इस विधा का प्रयोग कर रहे हैं। सरकार द्वारा इसके उन्नयन के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार को सेना और रेलवे में होम्योपैथी के चिकित्सकों की नियुक्ति करनी चाहिए और रोज गार के अवसर देना चाहिए। विकसित और स्वस्थ भारत की परिकल्पना बिना होम्योपैथी के अधूरी है। डा. भक्तवत्सल ने कहा कि होमियोपैथी अपनी गुणवत्ता के कारण समाज में लोकप्रिय होती जा रही है। इस चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का विश्वास तेजी से बढ़ा है। आज जहां दूसरी चिकित्सा पद्धति सिर्फ रोगों को रोकने का काम करती हैं वहीं होमियोपैथी बीमारियों को जड़ से खत्म करने में सक्षम साबित हुई है। उन्होंने कहा कि इस चिकित्सा पद्धति में डा. हैनीमन के सिद्धांतों पर चलकर ही सफलता हासिल की जा सकती है। इसका कोई शार्टकट नहीं हो सकता है। होमियोपैथिक को ऊंचाई तक ले जाना हम सभी की जिम्मेदारी है। इसके लिए निरंतर प्रयास करना होगा।

संचालन डा. प्रमोद गुप्ता ने किया। सचिव डा. सीजे मौर्य ने सभी का आभार प्रकट किया।

इस अवसर पर होमियोपैथिक परिवार के बच्चों द्वारा डा. नेहा दुबे के नेतृत्व में केक काटकर एंव भविष्य दीप कला केंद्र द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से डा. हैनीमन की जयंती मनाई गई। इस दौरान डा. देेवेश दुबे, डा. रणधीर सिंह, डा. मनोज मिश्र, डा. राजकुमार राय, डा. अनुतोष वत्सल, डा. नेहा दुबे, डा. एससी सैनी, डा. नीरज सिंह, डा. धीरज श्रीवास्तव, डा. अनुराग, डा. अबू मोहम्मद, डा. अजय पांडेय, इंदरा देवी, प्रतिभा निकेतन इंटर कालेज के प्रबंधक रमाकांत वर्मा, डा. एसके राय, लायन राकेश अग्रवाल, लायन रवि जायसवाल, डा. तापस, डा. एचपी त्यागी आदि ने डा. हैनीमन को श्रद्धासुमन अर्पित किया।

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