वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केन्द्र ट्रस्ट लमही में मुंशी प्रेमचंद की कहानी गुल्ली डंडा का पाठ विकास श्रीवास्तव ने किया। राजीव गोंड ने कहा कि इस कहानी में सामाजिक भेदभाव, छूत-अछूत, अमीरी-गरीबी का कोई स्थान नहीं है। साथ ही अमीरी चोंचलों के प्रदर्शन की गुंजाइश नहीं होती। और अगर भेद होते ही गुल्ली- डंडा की आत्मा मर जाती है। अपने बचपन को याद करते हुए प्रेमचंद ने इसी सामाजिक असमानता और भेदभाव की ओर पाठकों का ध्यान आकृष्ट किया है।

यह बात बिलकुल स्पष्ट हो जाती है कि प्रेमचंद की यह खासियत उनकी हर कहानी एक विडंबना को उजागर करती है। विवेक सूद ने विकास श्रीवास्तव का सम्मान किया। संचालन मनोज विश्वकर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन राजेश श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर विजय श्रीवास्तव, अशीम दत्ता , परी , नव्या, ज्योति , अंकित पाण्डेय, अजय यादव , राम अचल, व्योमश श्रीवास्तव, सुर्यभान, पंकज सिंह, रामजी , देव बाबू, उदय, रोहित, हर्ष विक्रम सिंह , सुरेश चंद्र दुबे आदि थे।

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