
वाराणसी। प्रेमचंद की जन्मभूमि लमही में प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा आयोजित साप्ताहिक साहित्यिक कार्यक्रम “सुनो मैं प्रेमचंद” के 1889वें दिवस पर इस सप्ताह मुंशी प्रेमचंद की चर्चित कहानी “बैंक का दिवाला” का पाठ किया गया। कहानी का पाठ वेद प्रकाश मिश्र ने किया, जिसमें साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं में निहित संवेदनाएं सर्वकालिक हैं और सदैव प्रासंगिक रहेंगी। प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि “बैंक का दिवाला” यह संदेश देती है कि सच्चा दिवाला धन का नहीं, बल्कि चरित्र का होता है।
निदेशक राजीव गोंड ने बताया कि इस श्रृंखला का उद्देश्य नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य से जोड़ना है। कार्यक्रम का संचालन आयुषी दूबे ने किया, स्वागत मनोज विश्वकर्मा व धन्यवाद ज्ञापन अशोक पाण्डेय ने किया। इस दौरान अनेक साहित्यप्रेमी व स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
