लेखक  डॉ. प्रेम शंकर दुबे (वाराणसी)

 

पृथ्वी और सूर्य मंडल की वर्तमान स्थिति को देखे तो यह जो विचित्र और अत्यंत भयावह दृश्य बन रहा है वह कुछ चिंतन की अपेक्षा करता है. इस समय वर्ष 2023 के राजा हैं बुध ग्रह, और मंत्री हैं शुक्र ग्रह । यह दोनों ही ग्रह पृथ्वी के लिए कष्टकारक ही हैं. यदि सिर्फ भारत की ही बात करे तो कोई ऐसा दिन नहीं जब कहीं न कहीं भीषण अग्नि कांड न हो रहा हो । कल ही बाम्बे में भी भयानक अग्नि कांड हुआ है।वाराणसी में भी लगातार अग्नि कांडो के समाचार दिखे है।यह तो बुध ग्रह का परिणाम है और पूरे देश में महिलाओं पर विभिन्न प्रकार के दुर्विचार प्रेरित कृत्य देखने और सुनने में लगातार मिल रहे हैं। साथ ही पूरे समाज में हत्या, अन्य अपराध लगातार बढ़ते दिख रहे हैं।

यह सब इस बात की तरफ इंगित कर रहा है कि लोंगों का अपने मन और बुद्धि पर नियंत्रण या तो कम या तो पूरी प्रकार फेल हो रहा है। सामान्य सी भी स्थिति में भी लोग चेहरे पर तनाव रखे दिखते हैं और चेहरे से हंसी तो पूरी तरह गायब ।यह क्या और कैसे? इसकी समीक्षा तो मनोवैज्ञानिक ही कर सकते है किन्तु हम जो देख रहे वह साझा कर रहे।

अब थोडा विश्व स्तर की बात करना भी आवश्यक है क्योंकि विगत दो दिनों में इजराइल और मुस्लिम क्षेत्रों में तनाव दिखा है और जो गुटबंदी और लामबंदी उत्पन्न हुई है वह हमारी दृष्टि से जल्दी ही एक भयानक रूप लेगी!ठीक इसी प्रकार की बात उक्रेन और रूस के बीच भी उठी है। रूस अब सी टी बी टी को अमान्य करनेकी बात कर रहा है और परमाणु शक्ति के प्रयोग की बात शुरू कर दिया है।ध्यान देने की बात यह है कि जब मन में कोई बात आती है और उस पर नियंत्रण नहीं रह जाता तो सिर्फ विनाश ही होता है।भारत ने कुछ हजार वर्ष पहले इसी प्रकार की स्थिति देखी है जो महाभारत कहलाया है।कटुता और स्थिति इतनी भयानक हो गयी थी कि एक योद्धा अश्वत्थामा ने तो गर्भस्थ शिशु के ऊपर ही एटॉमिक वेपन का प्रयोग कर दिया।

कटुता की स्थिति में बुद्धिनाश हो जाती है . अब जो स्तिथि बन रही है और उसमे विश्व के अन्य देश जो कि काफी दूर हैं फिर भी अकारण रूचि ले रहे। वह यह परमाणु युद्ध करा ही देंगे।निश्चित रूप से यह युद्ध उनसे दूर के स्थल पर भले ही होगा किन्तु यह न भूलें कि परमाणु युद्ध से निकलने वाला विषयुक्त वायु पुरे विश्व में फैलेगी और वह भले ही रेडिएशन प्रूफ चैम्बर में, जमींन के नीचे छिप कर रहे, तो भी आज नहीं तो कल वह भी उस रेडिएशन के शिकार होंगे।जगत के निर्माता ने एक ही सिद्धांत दिया है कि“जियो और जीने दो.” धरती को कलुषित मत करो .

 

लेखक का अपना विचार है।

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