वसंत कन्या महाविद्यालय में “मन मंथन’ का तृतीया दिवस

वाराणसी।वसंत कन्या महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के मनस्विनी क्लब द्वारा आयोजित तीन दिवसीय मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम ‘मन मंथन’ के तृतीय दिवस, शुक्रवार को विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत ‘जीवन के अनुभवों को सुनना: वास्तविक आवाज़ें, वास्तविक बदलाव’ विषय पर आधारित परिचर्चा से हुई।

 

परिचर्चा में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव, प्रो. निहारिका लाल, प्रो. पूनम पांडेय, प्रो. शशिकला, प्रो. इंदु उपाध्याय, प्रो. नीरंजना श्रीवास्तव एवं प्रो. मंजू कुमारी शामिल रहीं।

 

प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने ‘मन मंथन’ और ‘समुद्र मंथन’ के बीच संबंध स्थापित करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में आत्मचिंतन के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में परिवार और मित्रों के भावनात्मक सहयोग की भूमिका पर भी चर्चा की।

 

परिचर्चा के पश्चात सभी अतिथियों एवं प्रायोजकों का सम्मान किया गया। इसके बाद एक नृत्य प्रस्तुति हुई।

 

इसके पश्चात मुख्य अतिथि डॉ. लक्ष्मण यादव ने अपने व्याख्यान में टालमटोल की प्रवृत्ति और तनाव पर चर्चा करते हुए उनसे निपटने के प्रभावी उपाय बताए। वैद्य रिया द्विवेदी ने भी मानसिक स्वास्थ्य के विषय पर अपने विचार साझा किए। इसके बाद मनस्विनी क्लब की पत्रिका के चौथे संस्करण का विमोचन किया गया, जिसका विषय ‘प्रत्यक्षण’ था। तत्पश्चात विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए। कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मूसिकी क्लब द्वारा संगीत प्रस्तुति दी गई।

 

मनस्विनी क्लब की पूरी टीम, शोधार्थियों, मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास और सहयोग से तीन दिवसीय ‘मन मंथन’ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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