वसंत कन्या महाविद्यालय में गोतिपुआ नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति ने मोहा मन

वाराणसी। भारतीय शास्त्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से स्पिक मैके के वाराणसी चैप्टर के तत्वावधान में बुधवार को वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा में गोतिपुआ नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति आयोजित की गई।

ओडिशा की समृद्ध पारंपरिक नृत्य शैली के विविध आयामों से सजी इस प्रस्तुति में कलाकारों की भावपूर्ण मुद्राओं, लयबद्ध गतियों, अद्भुत शारीरिक संतुलन और आकर्षक सामूहिक संरचनाओं ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. आशा यादव के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कलाकारों एवं उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए भारतीय शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण और संवर्धन में स्पिक मैके की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों को भारतीय कला, संगीत और नृत्य की समृद्ध परंपराओं से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ते हैं तथा उनमें अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता विकसित करते हैं।

प्रबंधक श्रीमती उमा भट्टाचार्य ने अपने आशीर्वचनों के माध्यम से कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। उन्होंने भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में ऐसे आयोजनों की महत्ता को रेखांकित किया। उनके आशीर्वचनों ने विद्यार्थियों को भारतीय कला एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने तथा पारंपरिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. पूनम वर्मा ने किया। स्पिक मैके के वाराणसी चैप्टर से डाॅ शुभा सक्सेना ने गोतिपुआ नृत्य की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का परिचय देते हुए कलाकारों और उनकी कला-परंपरा से उपस्थित छात्राओं एवं शिक्षकों को अवगत कराया। उनके प्रभावी मंच संचालन ने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों को सुव्यवस्थित ढंग से जोड़ते हुए आयोजन को सहज और रोचक बनाया।

स्पिक मैके अर्थात सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंगस्ट यूथ भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और अन्य पारंपरिक कलाओं के माध्यम से युवाओं को देश की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में आयोजित इस प्रस्तुति ने छात्राओं को ओडिशा की विशिष्ट नृत्य परंपरा को प्रत्यक्ष रूप से देखने और उसके कलात्मक पक्षों को समझने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम में दशभुजा गोतिपुआ ओडिसी नृत्य परिषद के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। दल का नेतृत्व श्री बटकृष्ण दास ने किया। गोतिपुआ नृत्य की परंपरा के प्रतिष्ठित गुरु एवं पद्मश्री सम्मान से अलंकृत गुरु मगुनी दास की कलात्मक विरासत को इस अवसर पर विशेष रूप से रेखांकित किया गया। उनकी साधना और योगदान ने गोतिपुआ नृत्य को पहचान दिलाने तथा इसकी परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गोतिपुआ नृत्य ओडिशा की एक विशिष्ट पारंपरिक नृत्य शैली है, जिसका ओडिसी नृत्य के ऐतिहासिक विकास से भी गहरा संबंध रहा है। इस शैली में भावाभिनय, मुद्राओं, लय, शारीरिक लचीलेपन और कलात्मक कौशल का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। भगवान जगन्नाथ की भक्ति तथा ओडिशा की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी इस कला में आध्यात्मिक भावों और सौंदर्यबोध की प्रभावशाली अभिव्यक्ति मिलती है। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को इस परंपरा की विशिष्टता और उसके सांस्कृतिक महत्व को समझने का अवसर मिला।

नृत्य प्रस्तुति में कलाकारों ने आकर्षक वेशभूषा, भावपूर्ण मुद्राओं और अनुशासित सामूहिक संयोजन के माध्यम से गोतिपुआ शैली की विशेषताओं को सामने रखा। समूह की विविध नृत्य संरचनाओं ने प्रस्तुति को विशिष्ट स्वरूप प्रदान किया। इस नृत्य शैली में शारीरिक कौशल के साथ-साथ साधना, एकाग्रता, लयबोध और भावाभिव्यक्ति का विशेष महत्व है, जिसे कलाकारों की प्रस्तुति के माध्यम से समझा जा सकता था।

कार्यक्रम की सांगीतिक संगति ने भी प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया। श्री बटकृष्ण दास ने मर्दल वादन, श्री भगवान बेहरा ने गायन, श्री कबिराज प्रधान ने बाँसुरी वादन तथा श्री नीलकंठ नायक ने मंजीरा वादन के माध्यम से नृत्य को सांगीतिक आधार प्रदान किया। मर्दल की ताल, गायन की मधुरता, बाँसुरी के स्वर और मंजीरे की लय ने नृत्य की गतियों एवं भावाभिव्यक्ति को सशक्त बनाया। नृत्य और संगीत का यह समन्वय भारतीय प्रदर्शनकारी कलाओं की परस्पर संबद्धता का सुंदर उदाहरण रहा।

नृत्य दल में श्री सौम्यरंजन दास, श्री अभिमन्यु नायक, श्री लाबा मरांडी, श्री गणेश मलिक, श्री अमीर मलिक, श्री राहुल देय तथा श्री कुश्ना जेना सहित कलाकारों ने सहभागिता की। कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति ने गोतिपुआ नृत्य की परंपरा, उसकी कलात्मक विविधता और अनुशासित प्रशिक्षण की महत्ता को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के अंत में स्पिक मैके के वाराणसी चैप्टर की ओर से डॉ. शुभा सक्सेना ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने नृत्य दल के कलाकारों, महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. आशा यादव, प्रबंधक श्रीमती उमा भट्टाचार्य, महाविद्यालय की ओर से कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. सीमा वर्मा, विभागाध्यक्ष—संगीत (गायन) तथा उपस्थित छात्राओं एवं शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए स्पिक मैके के प्रयासों और इस आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों के योगदान की सराहना की।

वसंत कन्या महाविद्यालय में आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम भारतीय शास्त्रीय एवं पारंपरिक कलाओं के प्रति विद्यार्थियों की संवेदनशीलता विकसित करने और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को समझाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास रहा। विभिन्न विभागों की लगभग 150 छात्राओं एवं शिक्षकों की उपस्थिति ने इस आयोजन के शैक्षणिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ देश की विविध कलात्मक परंपराओं के प्रति सम्मान, सौंदर्यबोध और सांस्कृतिक चेतना को भी सुदृढ़ करते हैं।

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